स्थानीय आईएमए भवन में गंगाशील अस्पताल की ओर से चिकित्सकों की संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बरेली के गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय वाजपेयी ने 'गुर्दों की खराबी: शीघ्र निदान क्यों जरूरी है’ विषय पर जानकारी दी।
डॉ. वाजपेयी ने स्थानीय चिकित्सकों के साथ अनुभव बांटते हुए कहा कि गुर्दों की गंभीर खराबी का कोई इलाज नहीं है। इसका आहार परिवर्तन और दवाओं से इलाज किया जाता है। जब गुर्दे अधिकांश कार्य करना बंद कर देते हैं, तब उसे अंतिम चरण की रेनल खराबी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि शरीर के विभिन्न अंगों में सूजन, पेशाब करने की आवृत्ति में बदलाव, थकान अथवा कमजोरी अनुभव करना, सिर दर्द तथा संभ्रम, मतली अथवा वमन, भूख कम होना, सांस छोटी हो जाना और दम फूलना, त्वचा पर चुभन महसूस होना गुर्दा खराबी के प्रमुख लक्षण हैं।
इसी कड़ी में यूरोलोजिस्ट डॉ. लक्ष्मण स्वरूप ने पेशाब में खून आना, ग्रेस्ट्रो सर्जन डॉ. रीतेश माहेश्वरी ने पेट तथा लीवर की बीमारियों पर व्याख्यान दिया और अति विशिष्ट मरीजों के इलाज की वीडियो दिखाकर अनुभव साझा किए। गंगाशील अस्पताल के निदेशक हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत गुप्ता ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। इस मौके पर आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनिल सूद, सचिव डॉ. विजय पाठक, डॉ. पीके अग्रवाल, डॉ. एसके मेहरोत्रा, डॉ. वाईके सिंह, डॉ. एसएस दीक्षित, डॉ. अनूप अग्रवाल, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. हिकमत उल्ला सिद्दीकी समेत बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे।