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धूमधाम से विदा हुए चौक के राजा

Sun, 27 Sep 2015 08:57 PM IST
शाहजहांपुर।
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श्री गणेश उत्सव मंडल चौक के तत्वावधान में 17 सितंबर को क्षत्रिय धर्मशाला में पधारे गणपति बप्पा रविवार को बैंडबाजे के साथ गर्रा तट पर विसर्जित कर दिए गए। विसर्जन यात्रा धूमधाम से निकाली गई। शोभायात्रा में बाल स्वरूपों की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। मराठा युवाओं ने मुख्य मार्ग पर लटकाई गईं मटकियां भी फोड़ीं। शोभायात्रा में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था रही। समापन पर हाईकोर्ट के निर्देशानुसार गणपति बप्पा को गर्रा नदी किनारे खोदे गए गड्ढे में पानी भरकर विसर्जित किया गया।
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रविवार को सुबह से चौक क्षेत्र में उल्लास का वातावरण था। मराठा महिलाएं और बच्चे श्री गणेशोत्सव के समापन की तैयारियां कर रहे थे। दोपहर क्षत्रिय धर्मशाला में सजे दरबार में महिलाओं और पुरुषों ने गणपति बप्पा की विधि-विधान से पूजा अर्चना की। प्रसाद अर्पित किया और आरती कर सुख-समृद्धि की कामना की। सुहागिनों ने गणपति बप्पा से पति और संतानों के दीर्घायु होने की कामना की। मराठे पारंपरिक पोशाक सफेद कुर्ता-पाजामा और सफेद टोपी लगाए गदगद नजर आ रहे थे। करीब ढाई बजे बग्गियों पर देव स्वरूप में सजी झांकियां विराजीं, इसमें बाल स्वरूप बहुत आकर्षक लग रहे थे।
गणपति बप्पा, श्री राम दरबार, राधा कृष्ण, मां दुर्गा, साईं बाबा, शिव-पार्वती की झांकियों के साथ डीजे पर गणपति बप्पा का गुणगान करते भजनों पर श्रद्धालु थिरक रहे थे। अबीर-गुलाल से होली खेलते और रंगों से भरी मटकियां फोड़ते हुए श्रद्धालु गर्रा तट पर पहुंचे। शोभायात्रा देखने के लिए मुख्य मार्गों के किनारे लोग घंटों प्रतीक्षा करते रहे। पूजन कार्य पुरोहित अनंतराम शुक्ला ने कराया।
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गर्रा नदी के किनारे गणपति बप्पा को भोग लगाकर महा आरती हुई और इसी के साथ गड्ढे में भरे जल में उन्हें विसर्जित कर दिया गया। शोभायात्रा में समिति के अध्यक्ष अनिल माने, शिवाजी राव खांडे, विश्राम चव्हाण, प्रकाश मोरे, सुरेंद्र सिंह सेठ, अमित शर्मा, सचिन बाथम, हरनाम कटियार, तुषार खन्ना, सचिन खांडे, राजेंद्र निकम, विशाल मोरे, अक्षय मोरे, सूरज चव्हाण, सुदीप माने, उत्तम कदम आदि का योगदान रहा।

एक अदद गड्ढा खोदने को घंटों जूझे मजदूर
शाहजहांपुर। हाईकोर्ट के नदियों में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक लगाने और वाराणसी में हुए लाठी चार्ज के बाद सक्रिय हुए प्रशासन ने यहां लापरवाही नहीं बरती। दो दिन पहले की ही भांति रविवार को सुबह से ही गर्रा नदी के किनारे गणपति बप्पा को विसर्जित कराने के लिए एक गड्ढा खोदने की व्यवस्था की गई, इसके लिए करीब डेढ़ दर्जन मजदूर लगाए गए। गड्ढे से पानी निकालने और बाद में पानी भरने के लिए बाकायदा पंपिंग सेट का इंतजाम किया गया। ठेकेदार कुर्सी पर सिर पकड़े बैठे रहे। कारण यह था कि नदी के सटे ही गड्ढा खोदा जाना था, ज्यों-ज्यों काम होता था, उसमें पानी भर जाता था। भारी-भरकम गणपति को हल्के गड्ढे में विसर्जित करना भी टेढ़ी खीर थी, सो गड्ढा गहराई नहीं पकड़ रहा था। कई बार इंजन से तो कई बार बाल्टी-तसला आदि से पानी निकालने की व्यवस्था की कई। इस तरह एक गड्ढा खोदने में डेढ़ दर्जन मजदूरों के छक्के छूट गए।

तिलहर और अल्हागंज में भी श्रीगणेश की प्रतिमाएं विसर्जित
तिलहर। नगर में विगत दस दिनों से चल रहे गणेश उत्सव का रविवार को हर्षोल्लास के बीच समापन कर दिया गया। कुंवरगंज स्थित चेयरमैन वाले मंदिर से भगवान गणेश प्रतिमा के साथ शोभायात्रा निकाली गई जो कि पोटरगंज, केलरगंज, बिरियागंज, कुंवरगंज, बहादुरगंज, होती हुई रस्तोगी धर्मशाला पर संपन्न हुई। यहां भंडारा हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। शोभायात्रा में विभिन्न देव स्वरूपों की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। श्रद्धालु गणपति बप्पा मोरिया, अब की बरस तू जल्दी आ। एक दो तीन चार, गणपति तेरी जय जय कार। देवा हो देवा गणपति देवा आदि नारे लगा रहे थे। इस दौरान संजय मराठा, बाल किशन मराठा, उज्जवल मराठा, विशाल रस्तोगी, ममतेश गुप्ता, नितिन गुप्ता, सुनील सक्सेना, संजीव गुप्ता, रश्मि गुप्ता, मीनाक्षी गुप्ता, गीता रस्तोगी, राहुल गुप्ता आदि मौजूद रहे। बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ कोतवाल अरुण कुमार सिंह, मेहंदी हसन, उदयवीर सिंह, अतेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
अल्हागंज। गणेश प्रतिमा विसर्जन की वार्ड शिवपुरी और साहूकारा में भी काफी धूमधाम रही। रविवार को साहूकारा वार्ड में चेयरमैन चंद्रेश गुप्ता के मंदिर में स्थापित की गई। इस दौरान गणेश जी की प्रतिमाओं को काफी मनमोहक के साथ सजाया गया था। सुबह मंदिर प्रांगण में यजमान बनी नगर पंचायत चेयरमैन चंद्रेश गुप्ता, उनके पति अनिल गुप्ता और अन्य श्रद्धालुओं ने मंत्रोचारण के साथ हवन किया। बाद में बैंड बाजे के साथ भगवान गणेश प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने जमकर फूल वर्षा करते हुए एक दूसरे के अबीर-गुलाल लगाकर गले मिले। इसके बाद शोभायात्रा वैश्य धर्मशाला में ले जाई गई। वहां से कई वाहनों में सवार होकर श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की प्रतिमाओं को गंगा में प्रवाहित कर दिया।
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