डीएम के निर्देश के बाद भी ढाईघाट कांवड़ यात्रा मार्ग की मरम्मत नहीं हो सकी है। सावन के महीने में हजारों कांवड़िये गंगाजल भरने के लिए इसी खस्ताहाल सड़क से गुजरकर ढाईघाट जाने को मजबूर होंगे।
पांच जुलाई को कांवड़ यात्रा मार्ग का निरीक्षण करने आए जिलाधिकारी ने पूरी तरह उखड़े पड़े ढाईघाट मार्ग की दो दिन में मरम्म्त करवाने के निर्देश लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को दिए थे। उनके निर्देश पर दो दिन पहले लोक निर्माण विभाग के श्रमिकों ने ढाईघाट मार्ग की मरम्मत के नाम पर ढाईगांव से आगे रोड के गड्ढोें को पत्थर डालकर समतल करने का कार्य शुरू किया है। कांबड़ियों को नंगे पैर इन्हीं पत्थरों पर चलकर जल भरने के लिए ढाईघाट जाना पड़ेगा।
जितनी परेशानी कांवड़ियों को कंकड़युक्त ढाईघाट मार्ग पर नंगे पैर चलने में होगी, उतनी तो गोला पहुंचने में भी नहीं होगी। सरकार को ढाईघाट मार्ग की मरम्मत करवानी चाहिए थी।
रामरहीश, सेवादार दुर्गामंदिर मिर्जापुर
लगभग दस बर्ष से ढाईघाट से कांवड़ लेकर गोला जाने वाले सर्वेश शर्मा कहते हैं कि भगवा सरकार में ढाईघाट कांवड़ यात्रा मार्ग की मरम्मत नहीं होना घोर लापरवाही है।
कांवड़िया सुधीर मिस्त्री कहते हैं कि ढाईघाट मार्ग पूरी तरह उखड़ा पड़ा है। इस मार्ग पर नंगे पैर चलने वालों के तो पैर ही जख्मी हो जाएंगे। 00
राजेश गुप्ता पिछले कई वर्ष से पटना देवकली में भोलेनाथ पर कांवड़ चढ़ाने जाते हैं। कहते हैं कि ढाईघाट मार्ग की मरम्मत न करवाकर प्रशासन ने शिवभक्तोें की घोर उपेक्षा की है।
पप्पू गुप्ता कहते हैं, कि अधिकांश कांबड़िये रात में ढाईघाट में गंगाजल भरने जाते हैं। रात के अंधेरे में कंकड़-पत्थर वाले मार्ग पर नंगे पैर चलना बहुत मुश्किल हो जाएगा।