मीरानपुर कटरा में हाईवे के किनारे चोटी बेचता दुकानदार। संवाद
मीरानपुर कटरा। ग्राम फीलनगर के चुटीला उद्योग पर ग्रहण लग गया है। पहले महिलाओं के बालों में बंधने वाले चुटीले अब सिर्फ ट्रकों की शान बनकर रह गए हैं। महिलाओं के कम प्रयोग करने पर कारोबार डाउन हो गया है। पूर्व में जहां देश के विभिन्न इलाकों में चुटीलों की खेप जाती थी। अब वह गिने-चुने स्थानों पर रह गई है।
एक दशक पूर्व महिलाओं के सिर में बालों में बांधे जाने वाले फीलनगर गांव के चुटीले पूरे भारत में मशहूर थे। नई नवेली दुल्हनों के शृंगार के लिए फीलनगर के पटवा समुदाय के लोग तैयार चुटीलों में सोने-चांदी का काम करते थे। बढ़ती पश्चिमी संस्कृति के चलते चोटी बांधने का प्रचलन बहुत कम हो गया है। इसके चलते चुटीला उद्योग भी नीचे आ गया है।
चुटीले सिर के बजाये ट्रकों की सजावट करने के काम आने लगे हैं। लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित दुकान लगाए फीलनगर के चुटीले विक्रेता राजेश शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन ट्रक चालकों को दो हजार रुपये के चमकीले चुटीले बेचकर लगभग पांच सौ रुपये कमा लेते हैं।
राजस्थान और पंजाब तक जाते हैं चुटीले
फीलनगर के चुटीला कारीगर राजस्थान से कच्चा धागा मंगवाकर अपने घरों पर बनी भट्ठियों में कलर करते हैं। इसके बाद तैयार मॉल राजस्थान व पंजाब के लिए भेजते हैं। प्रधान के पति विनीत कुमार देवल, रविंद्र देवल, रंजीत कुमार मौर्य, मोहम्मद उस्मान, ओमप्रकाश समेत तमाम लोग कारोबार से जुड़े हैं। कारीगर राजेश ने बताया कि वह पूरे दिन में सौ से सवा सौ चुटीले बनाकर तीन से चार सौ रुपये कमाते हैं।
मीरानपुर कटरा में हाईवे के किनारे चोटी बेचता दुकानदार। संवाद