जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में बायोमैट्रिक अटेंडेंस यंत्र लगवाने का काम अब हाल-फिलहाल होता नजर नहीं आ रहा है। शासन से इसके लिए कोई बजट न होने की वजह से बीएसए की योजना ठंडे बस्ते में पड़ी नजर आ रही है।
शैक्षिक सत्र 2014-15 के शुरुआती महीनों में जिले में संचालित हो रहे 16 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में बायोमैट्रिक अटेडेंस यंत्र लगवाए जाने थे। इसको लेकर बीएसए ने काफी तैयारियां भी की थीं। लखनऊ से आई किसी कंपनी के एक एजेंट बीएसए दफ्तर में भी आया था, जहां इन यंत्रों को लगाने के लिए बातचीत हुई थी।
तब बीएसए ने कहा था कि सभी स्कूलों में बायोमैट्रिक यंत्र लगवाए जाएंगे। इसके पीछे बीएसए की मंशा यह थी कि कस्तूरबा स्कूलों से बगैर बताए गायब रहने वाली पार्टटाइम और फुलटाइम टीचरों के साथ ही स्कूल के अन्य स्टॉफ पर भी नजर रखी जा सके, लेकिन करीब छह माह गुजरने के बाद भी बीएसए की इस योजना को धरातल पर नहीं लाया जा सका। इसके फलस्वरूप किसी भी कस्तूरबा स्कूल में बायोमैट्रिक अटेंडेंस यंत्र नहीं लगाए जा सके।
‘बीएसए ने बायौमैट्रिक अटेंडेंस यंत्र लगवाने के लिए कहा था। परियोजना से इसके लिए कोई आदेश नहीं मिला था, जिससे इसके लिए धनराशि भी नहीं आई। साथ ही इसके लिए यहां से धनराशि स्वीकृत कराने के लिए कोई मांगपत्र भी शासन को नहीं भेजा गया है।’
- इंद्रेश सिंह, जिला समन्वयक, बालिका शिक्षा
‘शैक्षिक सत्र 2014-15 के समाप्त होने तक यानी कि आगामी 31 मार्च तक कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में बायोमैट्रिक अटेंडेंस यंत्र लगवा दिए जाएंगे। इससे विद्यालयों की स्थितियों में काफी सुधार किया जा सकेगा।’
- राजेश कुमार वर्मा, बीएसए