कोतवाली पुलिस ने करीब एक महीना पहले जगेंद्र के खिलाफ अपहरण और जानलेेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस भी जानती थी कि रिपोर्ट फर्जी दर्ज कराई गई है, लेकिन रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस इस कदर आक्रामक हो गई कि जगेंद्र की तलाश में ताबड़तोड़ दबिशें दी जाने लगीं। पुलिस किसी भी सूरत में जगेंद्र को गिरफ्तार करना चाहती थी।
कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी निवासी अमित भदौरिया ने 12 मई को जगेंद्र समेत तीन लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले और अपहरण की धारा में मुुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर में कहा गया था कि अपने दो साथी विनोद और अनुराग मिश्र के साथ रास्ते में घेरकर जगेंद्र ने अमित के अपहरण का प्रयास किया था। असफल होने पर जगेंद्र ने तमंचे से फायर किया था। अमित के गोली नहीं लगी थी फिर भी पुलिस ने जानलेवा हमले की धारा में मुकदमा दर्ज किया, जबकि पुलिस ऐसे मामलों में जानलेवा हमले की धारा नहीं लगाती है, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने न केवल मुकदमा दर्ज कर लिया, बल्कि किसी शातिर अपराधी की तरह उनकी गिरफ्तारी को दबिश देना शुरू कर दी। मामला इतना गंभीर नहीं था और न ही जगेंद्र कोई अपराधी थे। पुलिस चाहती तो मामले की विवेचना करके कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकती थी। कोर्ट इसमें अपना निर्णय सुना देती। वैसे भी जगेंद्र कहीं भाग नहीं रहे थे। आखिर पुलिस की प्रताड़ना ने जगेंद्र की जान ले ली।
खुटार से शुरू की थी पत्रकारिता
जगेंद्र ने खुटार से एक दैनिक समाचार पत्र से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। इसके बाद जगेंद्र शहर में आ गए और फिर कई दैनिक समाचार पत्रों में काम किया। इसके बाद वह सोशल मीडिया में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम करने लगे थे। इस दौरान वह कई अधिकारियों, व्यापारी नेताओं और राजनीतिक लोगों की खबरों को लेकर चर्चा में रहे।
अब जगेंद्र के पिता ने दी आत्मदाह की चेतावनी
खुटार। पत्रकार जगेंद्र सिंह की लखनऊ में मौत के बाद से उनके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। खुटार के मोहल्ला कोट स्थित आवास पर मौजूद जगेंद्र सिंह के बुजुर्ग पिता सुमेर सिंह ने कहा कि जगेंद्र को जलाकर मारने वाले पुलिसकर्मियों और घटना की साजिश रचने वाले मंत्री सहित सभी दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर वह परिवार के सभी सदस्यों सहित डीएम कार्यालय पर आत्मदाह करने को विवश होंगे।
जगेंद्र सिंह की पत्नी सुमन, पुत्र राहुल, राजन, पुत्री रचना आदि लखनऊ में हैं। घर पर मौजूद वृद्ध पिता सेवानिवृत्त पोस्टमास्टर सुमेर सिंह ने कहा कि उनके पुत्र की पुलिस और नेताओं ने मिलकर हत्या कर दी। जगेंद्र जलाए जाने की घटना से कई दिन पहले से ही अपनी हत्या की आशंका जता रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनकी सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया। उल्टा अमित प्रताप भदौरिया की ओर से दर्ज फर्जी मुकदमे में उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जाने लगे। सुमेर बोले, जगेंद्र की आशंका सही निकली। पुलिस ने उनके बेटे को जलाकर मार डाला। सुमेर सिंह ने राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा, कोतवाल श्रीप्रकाश राय, उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों और अमित प्रताप भदौरिया सहित कई लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेजने की मांग की है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग भी की है।
तमाम संगठनों ने जताया शोक
जगेंद्र सिंह की मौत पर प्रेस क्लब की शोकसभा में अध्यक्ष सरदार शर्मा, महामंत्री शिव कुमार, मोहम्मद इरफान, आरिफ सिद्दीकी, अशोक गुप्ता प्रेम शंकर गंगवार, राजबहादुर सिंह आदि ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उधर, सृजन साहित्यिक संस्था के रामलड़ैते श्रीवास, रामबाबू शुक्ला, तेजपाल जोशी, प्रदीप बैरागी आदि ने श्रद्धांजली दी है। व्यापार मंडल अध्यक्ष अनिल गुप्ता, महामंत्री गुरूसेवक सिंह, नीरज सिंह, ऋषिराम मिश्रा आदि ने गहरा दुख जताया है।