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वैक्सीन की कमी से पशुओं को सर्दी की बीमारियों से बचाना होगा कठिन

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शाहजहांपुर। सर्दी परवान चढ़ने के साथ जनपद में पशुओं पर खुरपका, मुंहपका, गला घोंटू आदि बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। पशु चिकित्सक भी मानते हैं कि इन रोगों का प्रसार बढ़ा तो पशुओं को उनसे बचाना कठिन हो जाएगा। पशुओं को मौसमी बीमारियों से बचाव को एफएमडी (फुट एंड माउथ डिजीज) वैक्सीन का स्टॉक कई माह पहले खत्म हो चुका है और उसकी नई खेप मिलने की कोई उम्मीद नहीं हैं।
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आमतौर पर पशुओं का वर्ष में दो बार मार्च से अप्रैल और अक्तूबर से नवंबर के बीच वैक्सीनेशन किया जाता है। फिलहाल, गलाघोंटू की रोकथाम के लिए एचएस (हीमोरैगिक सेप्टीसीमिया) वैक्सीन की सिर्फ नौ हजार बॉयल (99000 खुराक) शेष बची हैं, जबकि जनपद में विभिन्न प्रजातियों के दुधारू पशुओं की संख्या 7.50 लाख से ज्यादा है।
दुधारू पशुओं मेें खुरपका और मुंहपका रोग की रोकथाम के लिए लगाई जाने वाली एफएमडी (फुट एंड माउथ डिजीज) वैक्सीन प्रयोगशाला जांच में गुणवत्ताहीन पाए जाने पर शासन ने गत वर्ष अक्तूबर में यह वैक्सीन पशुओं को लगाने पर रोक लगा दी थी। खास यह है कि पशु चिकित्सा निदेशालय से एफएमडी वैक्सीन पर रोक लगाने का यह आदेश यहां प्राप्त होने से पहले ही जिले के विभिन्न विकास खंडों में 3.11 लाख पशुओं को यह वैक्सीन लगा दी गई। विभागीय अधिकारियों के अनुसार एफएमडी की शेष वैक्सीन रोक दी गई है। साथ ही उन पशुओं में रोग और वैक्सीन के प्रभाव की विशेष निगरानी की गई, जिन्हें यह वैक्सीन दी जा चुकी है।
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बारिश के सीजन में दुधारू पशुओं को खुरपका, मुंहपका जैसे संक्रामक रोगों से बचाने के लिए हर साल 15 मार्च से उनका एफएमडी टीकाकरण किया जाता है। गत वर्ष लॉकडाउन के कारण यह काम अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन पशुपालन निदेशालय से मिली गाइडलाइन के अनुसार यह काम पहले सितंबर के दूसरे सप्ताह तक बढ़ाया गया, लेकिन इस वैक्सीन की 866500 बॉयल गत वर्ष अक्तूबर में मिल सकीं। अगले सप्ताह से पशु टीकाकरण शुरू कर दिया, लेकिन 30 फीसदी दुधारू पशुओं को एफएमडी खुराक दिए जाने के बाद निदेशालय से करीब 12 बैच नंबरों वाली इस वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश मिल गए। तभी से एफएमडी की नई खेप नहीं मिल सकी।
जिले में पशुओं पर एक नजर
गोवंशीय 288478
महिषवंशीय 490227
भेड़ 4832
बकरियां 203681
जिस तरह उपभोग अवधि (एक्सपायरी डेट) निकलने के बाद दवाएं बेअसर हो जाती हैं, लेकिन अन्य कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं। उसी तरह कुछ विशेष बैच नंबर वाली एफएमडी को जांच में गुणवत्ताहीन पाए जाने पर उसके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी। सर्दियों मेें दुधारू पशुओं को खरपका और मुंहपका से बचाना जरूरी है, क्योंकि इन बीमारियों से उनकी दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है। पश्चिमी यूपी के जनपदों में एफएमडी वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है। इसलिए यहां भी यह वैक्सीन जल्द मिलने की उम्मीद है। गलाघोंटू की रोकथाम को पशुओं को एचएस वैक्सीन दिए जाने के बाद भी स्टॉक में तमाम डोज शेष हैं। - डॉ. आरबी सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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