शाहजहांपुर। तंबाकू से दोस्ती जवानी में ही लोगों को बुढ़ापे की दहलीज तक पहुंचा रही है। इसकी शुरुआत सिर्फ शौक से होती है, लेकिन इसका अंत अस्पताल तक पहुंच जाता है। शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में केवल कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। प्रभावी इलाज के लिए लखनऊ-दिल्ली जाना पड़ता है।
हर साल लोगों को जागरूक करने के लिए 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ कैंसर चिकित्सक राशिका सचान का कहना है कि तंबाकू का त्याग ही कैंसर से बचाव की पहली और सबसे प्रभावी सीढ़ी है। मुंह के कैंसर के रोगी अधिक आते हैं। मेडिकल कॉलेज में कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। नशा मुक्ति केंद्र पर भी आने वाले लोगों को जागरूक किया जाता है। मुंह, गले, फेफड़े और भोजन नली के कैंसर के पीछे तंबाकू सबसे बड़ा कारण है। इन बीमारियों से बचाव को अधिकांश को केवल तंबाकू से दूरी बनाकर ही रोका जा सकता है। उनका कहना है कि युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराएं और तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें। तंबाकू का हर रूप कैंसर को न्योता देता है।
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ऐसे भी कर सकते बचाव
विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर शौक पूरा करने के लिए चार दानों से गुटके की शुरुआत की जाती है। तंबाकू, गुटखा, सिगरेट आदि की बिक्री स्कूल-कॉलेजों के पास हो रही है। किशोरों में इसका शौक काफी बढ़ गया है। महिलाएं भी तंबाकू के मंजन से भी रोगी बन रही हैं। तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए 50 ग्राम सौंफ व इतनी ही मात्रा में अजवायन लेकर तवे पर भूने, थोड़ा नीबू का रस एवं हल्का काला नमक डालें, फिर एक डिब्बी में करके इसे अपनी जेब में रख लें। जब भी तंबाकू, सिगरेट आदि की तलब लगे तो डिब्बी निकाल कुछ दाने मुंह में रख लें और चबाते रहें। ऐसा करने से तलब कम हो सकती है।
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नशा छोड़ने के उपाय
= नशा छोड़ने का मन से निश्चय करें।
= एक बार में छोड़ना मुश्किल लगे तो धीरे-धीरे मात्रा कम करते हुए छोड़ें।
= मित्रों और परिचितों को बता दें कि आपने नशा छोड़ दिया है, ताकि वे नशा करने को बाध्य न करें।
= डायरी पर लिखें कि आप कब और कितनी मात्रा में नशा करते हैं, क्या कारण है जो आप नशा करने को प्रेरित होते हैं।
= अपने पास सिगरेट, गुटखा, तंबाकू, माचिस आदि रखना छोड़ दें।
= खान-पान एवं अपने लाइफ स्टाइल में सुधार करें।
नोट : यह सलाह वरिष्ठ कैंसर चिकित्सक राशिका सचान की ओर से दी गईं हैं।