शाहजहांपुर/जलालाबाद। युवती के लिखित बयान में ‘नहीं’ शब्द बढ़ा देने के मामले में न्यायालय की सख्ती के बाद एसपी ग्रामीण दीक्षा भंवरे ने जांच कर दोषी पाए जाने पर विवेचक दरोगा संजीव को निलंबित कर दिया है।
जलालाबाद थाना क्षेत्र से एक युवक और युवती अपनी मर्जी से घर से चले गए थे। पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 16 अप्रैल को पुलिस ने युवक को रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। न्यायालय ने दोनों के अभिलेखों की जांच की। पाया गया कि जिन युवक और युवती को नाबालिग बताया गया, वे दोनों बालिग हैं।
इसके बाद न्यायालय ने युवक को रिमांड पर देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद न्यायालय ने इस मामले की विस्तृत जांच की। जांच में युवती के लिखित बयान में ओवरराइटिंग पाई गई। युवती ने अपने बयान में युवक के साथ मर्जी से जाने की बात कही थी, जबकि विवेचक ने उसमें ‘नहीं’ शब्द जोड़ दिया था। कोर्ट ने वीडियो बयान भी देखे।
न्यायालय ने इस मामले में एसओ, विवेचक व महिला एसआई काजल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने के साथ एसपी को पत्र भेजा था। एसपी सौरभ दीक्षित ने मामले की जांच एसपी ग्रामीण भंवरे दीक्षा अरुण को सौंपी। एसपी ग्रामीण ने बताया कि एसपी के निर्देश पर चल रहे अभियान के तहत महिला अपराधों में लगातार कार्रवाई की जा रही है।
17 अप्रैल को न्यायालय से एक पत्र प्राप्त हुआ कि एक मुकदमे में बयान में भिन्नता पाई गई है। जांच में विवेचक को दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया है। गुण दोष के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।