शाहजहांपुर। रबी विपणन वर्ष 2018 में विकास खंड खुटार के गांव चांदपुर स्थित साधन सहकारी समिति परिसर में खुले पीसीएफ के गेहूं क्रय केंद्र की जांच में सहायक विकास अधिकारी अश्वनी कुमार द्वारा बिचौलियों से खरीद किए जाने के मामले में केंद्र प्रभारी के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर में विवेचक ने लीपापोती कर अंतिम आख्या लगा दी। शुक्रवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ओमवीर सिंह ने इस मामले में अभियोजन अधिकारी का पक्ष सुनने के बाद न सिर्फ पुलिस की फाइनल रिपोर्ट खारिज कर दी, संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी को अपने स्तर से मामले की दोबारा विवेचना करने और पुलिस अधिकारियों को विवेचक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
यह है गेहूं खरीद का पूरा मामला
वर्ष 2018 में 18 अप्रैल को तत्कालीन डीएम ने चांदपुर के पीसीएफ क्रय केेंद्र का निरीक्षण किया था। उस वक्त केंद्र प्रभारी रामबाबू सेंटर से अनुपस्थित थे। जांच में पाया गया कि शासन की गेहूं क्रय नीति के विपरीत केंद्र प्रभारी द्वारा बिचौलियों से खरीद की जा रही है। इसी जांच निष्कर्ष के आधार पर एडीओ ने डीएम के निर्देश पर केंद्र प्रभारी के खिलाफ खुटार थाने में धारा 409, 467 और 468 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एफआईआर में क्रय केंद्र पर मिले में क्रय अभिलेख 6-आर में विक्रेता किसानों के हस्ताक्षर नहीं होने, खाली बोरों के स्टॉक में कमी, क्रय केंद्र पर बिना आवश्यक अभिलेखों के ट्रॉली सीज किए जाने आदि खामियों का उल्लेख किया गया। यह प्रकरण सुनवाई के लिए सीजेएम कोर्ट जाने पर विवेचक ने मुकदमा खत्म कराने को कई तथ्यों को अनदेखा करके अंतिम रिपोर्ट लगा दी।
वादी ने मुकदमा खारिज कराने का किया प्रयास
मामले का खास पहलू यह भी है कि वादी एडीओ ने आरोपी केंद्र प्रभारी को बचाने के लिए मुकदमा खारिज कराने का प्रयास किया और इसी नीयत से विवेचक को स्वयं इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया कि विभागीय जांच से केंद्र प्रभारी पर कोई अपराध साबित नहीं होता। वादी के यू-टर्न लेने से विवेचक को भी जांच के नाम पर लीपापोती करने का मौका मिल गया। विवेचक ने न्यायालय में प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट में कहा कि निरीक्षण के दौरान केेंद्र प्रभारी आरटीजीएस के काम से खुटार सहकारी बैंक गए थे और इसका भ्रमण रजिस्टर में उल्लेख है। एक हजार खाली बोरे हरिहरपुर सहकारी समिति को प्राप्त कराए गए, जिसके बारे में रसीद चालान दिया गया है। मौके से बरामद ट्रॉली गांव सिल्हुआ निवासी संजीव दीक्षित का गेहूं लेकर आई थी, जिसे बाद में एसडीएम ने थाने से रिलीज किया।
इन खामियों की दोबारा विवेचना में होगी जांच
अभियोजन अधिकारी को सुनने और मुकदमे की पत्रावली का अध्ययन करने पर सीजेएम ने ऐसे कई अनुत्तरित प्रश्र उठाए हैं, जिनके उत्तर दोबारा होने वाली विवेचना में मिलने की उम्मीद है। क्रय केंद्र पर किसानों द्वारा बेचे गए गेहूं का पंजीकरण ओर सत्यापन कराया गया अथवा नहीं, पंजीकृत विक्रेता अथवा किसान द्वारा गेहूं बिक्री के समय केंद्र पर बैंक खाता, आधार कार्ड, खतौनी आदि प्रपत्रों की प्रति केंद्र पर उपलब्ध कराई गई अथवा नहीं, गेहूं की गुणवत्ता निर्धारित कर केंद्र प्रभारी ने ऑनलाइन टोकन जारी किया या नहीं, विक्रेता किसान को रसीद दी गई अथवा नहीं, खाली बोरे किस सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से दिए और जिसे दिए गए, वहां का स्टॉक सत्यापन क्यों नहीं किया गया आदि कई ऐसे सवाल हैं, जिन पर विवेचक ने ध्यान नहीं दिया। इन्हीं खामियों के आधार पर सीजेएम ने दोबारा विवेचना का आदेश पारित कर यह भी कहा है कि गेहूं खरीद जैसे राष्ट्रीय हित के प्रकरण में विवेचक द्वारा विवेचना में की गई लापरवाही एवं शिथिलता के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति डीजीपी, बरेली जोन के आईजी और पुलिस अधीक्षक को भेजी जाए। इस प्रकरण की न्यायालय में अगली सुनवाई तिथि अगामी नौ अप्रैल नियत की गई है।