शाहजहांपुर। वन विभाग में करीब 30 लाख रुपये के जिप्सम उर्वरक घोटाले की जांच के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष एसडीओ डॉ.सुशील कुमार जांच के लिए सदर रेंज की शक्ति पौधशाला पहुंचे। यहां उन्हें खाद की बोरियां नहीं मिलीं। दो अगस्त को खाद नर्सरी में बने कक्ष में रखी हुई थी। बात करने पर पता चला कि कैंट एरिया में ऊसर भूमि पर डलवा दी गई है।
पौधरोपण महाअभियान की समाप्ति और बरसात के दौरान खाद डलवाने की बात गले नहीं उतरी। अब कमेटी टेंडर प्रक्रिया और खाद की मात्रा रिसीव करने में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही, इस विषय पर जांच कर रही है।
बता दें कि वन विभाग में जिप्सम उर्वरक की सीलबंद बोरियों में लिखे गए वजन 50 किलो के सापेक्ष 10 से 15 किलो खाद निकलने तथा पौधरोपण सत्र में प्रयोग न किए जाने का मामला सुर्खियों में आने के बाद डीएफओ सचिन कुमार ने एसडीओ डॉ. सुशील कुमार की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की है।
मामले में मुख्य वन संरक्षक बरेली मंडल पीपी सिंह के संज्ञान लेने के बाद जांच में तेजी आई है। एसडीओ डॉ. सुशील कुमार बृहस्पतिवार को सदर रेंज की शक्ति पौधशाला में जांच के लिए पहुंचे। यहां उन्हें खाद की बोरियां नदारद मिलीं। पोल खुलने के डर से जांच से पहले ही बोरियों को हटवा दिया गया। इसी वजह से वजन भी नहीं हो पाया।
एसडीओ ने जब इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी सदर शत्रुघ्न प्रसाद से पूछा तो उन्होंने कैंट इलाके में खाद डलवाए जाने की बात कही। फिलहाल अब टेंडर प्रक्रिया की छानबीन की जा रही है। खाद बिना देखे किसने रिसीव की और अब तक क्यों नहीं डाली गई, इस संबंध में भी जांच की जा रही है।
सदर रेंज की शक्ति पौधशाला में जांच की गई थी। यहां से खाद की बोरियां नदारद मिलीं। टेंडर प्रक्रिया और खाद को प्राप्त करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी।
-डॉ. सुशील कुमार, एसडीओ/जांच अधिकारी वन विभाग