शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्राॅमा सेंटर में गंभीर रूप से घायल आने वाले मरीजों के परिजनों को निजी अस्पताल ले जाने का दबाव डालने की जांच शुरू कर दी गई है। शासन के निर्देश पर प्राचार्य ने सीएमएस के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम को गठित कर रिपोर्ट मांगी है।
ट्राॅमा सेंटर में आने वाले गंभीर रूप से घायल मरीजों के परिजनों के मोबाइल नंबर लेकर एंबुलेंस चालक हालत गंभीर बताकर रेफर कराने का दबाव डालते हैं। कमीशन के लिए चलने वाले खेल में अस्पताल स्टाफ द्वारा मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने का अनुमान है। इसे लेकर 17 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने हमें पता है तुम्हारे मरीज की हालत गंभीर है...निजी अस्पताल चलो जान बच जाएगी शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। यह वाक्या खुटार के हरिमोहन के परिजन के साथ हुआ था।
सड़क हादसे में घायल होने पर उनकी हालत ठीक होने के बावजूद एंबुलेंस चालक उन्हें गंभीर बताकर परिजनों को बार-बार फोन कर निजी अस्पताल ले चलने का दबाव डाल रहा था। खबर छपने के बाद शासन ने संज्ञान लिया और प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार से जानकारी ली। प्राचार्य ने मामले में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है।
सीएमएस डॉ. नेपाल सिंह, डॉ. महेंद्र कुमार और डॉ. विभोर जैन को जांच कमेटी में शामिल किया है। टीम ने मरीजों के तीमारदारों के बयान भी दर्ज किए हैं। प्राचार्य ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
सात अस्पतालों में तलाशे एजेंट के जरिये भर्ती मरीज
-शासन के निर्देश के बाद एसीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने सात अस्पतालों का निरीक्षण किया। वहां एजेंट के जरिये भर्ती मरीजों की जानकारी ली। उन्होंने साफी अस्पताल, केयर अस्पताल, सलाह अस्पताल, न्यू साईं अस्पताल, रीना अस्पताल सिंधौली व शहर में बेग अस्पताल, हयातपुरा, ग्लोबल अस्पताल में मरीजों से पूछताछ की। सभी ने एजेंट के जरिये नहीं आने की जानकारी दी। बताया कि वह रिश्तेदार या खुद आए हैं।