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लॉकडाउन में बंद औद्योगिक इकाइयों को आज से मिलेगा पुनर्जीवन

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शाहजहांपुर। प्रदेश मेें कोरोना से प्रभावित जिलों की सूची से बाहर आने के साथ ही ग्रीन जोन में शामिल हुए जनपद की चुनिंदा औद्योगिक इकाइयों में वायरस संक्रमण से बचाव के नियमों का कड़ाई से पालन करने की शर्त पर सोमवार से उत्पादन शुरू हो जाएगा। सरकार के आदेश पर प्रशासन ने फिलहाल यहां की पेपर मिल, बिजली और खाद्य वस्तुओं का उत्पादन करने वाली इकाइयां संचालित कराने का निर्णय लिया है। बता दें कि जिले में छोटी-बड़े करीब चार हजार कारखाने हैं। इनमेें 250 से अधिक आटा एवं चावल मिलों समेत कई नमकीन फैक्टरियां, चिवड़ा मिल, राइस ब्रॉन तेल बनाने वाले उद्योग शामिल हैं। सोमवार से खाद्य उत्पाद बनाने वाले ये सभी कारखाने चालू हो जाएंगे, लेकिन उन्हें कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कर्मचारियों की संख्या सीमित रखने के साथ शासन की गाइड लाइन के मुताबिक अन्य एहतियाती उपाय भी बरतने होंगे। जिले में आटा मिल, चावल मिल, पेपर मिल, ऑयल मिल आदि कृषि आधारित उद्योगों की बहुतायत है और उन्हें लॉकडाउन खुलने पर कच्चा माल सुलभ होने में कोई दिक्कत नहीं होगी। आटा और चावल मिलों को गेहूं-धान पहले से मिल रहा है और यह मिलें उत्पादन जारी रखे हुए हैं। नमकीन, ब्रेड, बिस्किट, रस्क आदि बनाने वाली फैक्ट्रियों को भी बेसन, मैदा, दाल, तेल आदि कच्चा माल आसानी से मिलेगा। जिन उद्योगों को उत्पादन शुरू करने की अनुमति दी गई है, उन्हें सामाजिक दूरी का पालन करने के साथ बुलाए गए कामगारों की स्क्रीनिंग करनी होगी और हाथ धोने के लिए गेट पर साबुन, सैनिटाइजर आदि रखना जरूरी होगा।
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काष्ठ आधारित उद्योग रहेंगे बंद
जिले में दर्जन भर से ज्यादा काष्ट आधारित उद्योग हैं। मगर काष्ठ आधारित प्लाईवुड, फर्नीचर, रंग आदि बनाने वाले उद्योगों को लकड़ी, रसायन आदि बाहर से मंगाने होंगे, इसलिए ऐसी सभी इकाइयां फिलहाल बंद रहेंगी।
सरकारी कार्यालयों में सीमित रहेंगे कर्मचारी
लॉकडाउन में गरीब तबके के जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता, भोजन, राशन वितरण आदि कार्यों के लिए कलक्ट्रेट में प्रशासनिक एवं कोषागार अधिकारियों से लेकर विकास भवन और आपूर्ति विभाग के कई कार्यालय पहले से आवश्यकता के अनुरूप खुल रहे हैं। सोमवार से विकास, कृषि, राजस्व, शिक्षा, समाज कल्याण, ग्राम्य विकास, युवा कल्याण, दिव्यांग कल्याण आदि विभागों के कार्यालय नियमित रूप से खुलने लगेंगे। लेकिन उनमें कर्मचारियों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। जिन विभागों में कर्मचारियों की संख्या अधिक है, वहां अधिकतम 33 फीसदी कर्मचारी एक दिन बुलाए जाएंगे और अन्य कर्मचारियों को अगले कार्य दिवस में आना होगा।
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कर्मचारियों का बना रोस्टर, जनता को आने की इजाजत नहीं
मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि विभाग वार सभी कर्मचारियों की ड्यूटी का रोस्टर बना लिया गया है। सीडीओ के अनुसार इस दौरान जन सामान्य के किसी व्यक्ति को अपनी समस्या अथवा शिकायत लेकर आने की इजाजत नहीं होगी क्योंकि यह लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन होगा।
उद्यमियों की बात
भारतीय रिजर्व बैंक ने लॉकडाउन में बंद उद्योगों को कामगारों के वेतन भुगतान सहित अन्य जरूरी खर्चों के लिए कई रियायतें घोषित की हैं। आरबीआई ने बैंक लिमिट पर दस प्रतिशत अतिरिक्त ऋण देने की बात कही है, लेकिन विभिन्न बैंक अतिरिक्त ऋण की धनराशि पर अलग-अलग ब्याज मांग रही हैं, इसलिए प्रशासन को बैंक अधिकारियों के साथ बैठक कर इस समस्या का निवारण करना चाहिए।
- अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
एक माह से बाजार बंद होने के कारण सभी उद्योगों को काफी वित्तीय हानि हो चुकी है। फूड इंडस्ट्री को चलाने की अनुमति देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सरकार को उन्हें टैक्स भुगतान, बिजली बिलों, बैंक लिमिट पर ब्याज आदि में भी छूट मिलनी चाहिए। ऐसा होने पर जिले में खाद्य वस्तुएं बनाने वाली कम पूंजी की 60 से ज्यादा इकाइयों को काफी राहत मिल जाएगी।
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- विनय अग्रवाल, नमकीन निर्माता
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