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इंदिरा आवासों और शौचालयों के आवंटन व निर्माण में खेल

Sat, 07 Feb 2015 11:33 PM IST
मिर्जापुर।
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ब्लाक में इंदिरा आवासों और शौचालयों के आवंटन और निर्माण में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। दलालों ने ऊपर से नीचे तक की सेटिंग कर अपात्रों के नाम कई बार आवास और शौचालय आवंटित करवाकर लाखों रुपये का बंदरबांट कर लिया है। अधिकारियों और कर्मचारियों कोे दलाल ऊंची पहुंच केे चलतेे टिकनेे नहीं देते। इससे यहां सरकारी योजनाओं में होने वाला बंदरबांट रुक नहीं पा रहा है।
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ब्लाक में वर्ष 2014-15 में सामान्य श्रेणी के 463 गरीबों को इंदिरा आवास देकर लाभांवित किए जाने के सरकारी लक्ष्य के विपरीत दलालों ने 652,अल्पसंख्यक के 117 के विपरीत 119,एससी के 379 के विपरीत 341 लाभार्थियों के नाम आवास बिना किसी जांच पड़ताल केे स्वीकृत करवाकर पहली किस्त के रूप मे 35-35 हजार रुपये बैंक से आहरित करवा दिए गए हैं। दूसरी किस्त के मांग पत्र में एक ही आवास में अलग-अलग लाभार्थियों को खड़े करके फोटो बनवाकर जांच अधिकारी की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। इसे बीडीओ नेे पहली ही नजर में पकड़ लिया है।
क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में एक-एक लाभार्थी के नाम कई बार आवास आवंटित कर दिए गए हैं जबकि एक लाभार्थी परिवार को सिर्फ एक ही बार आवास आवंटित किया जा सकता है। रामगंगा के किनारे वाली ग्राम पंचायतों में तो पिछले वर्षों में तमाम इंदिरा आवास कागजों पर बनकर नदी में बह चुके हैं। शौचालयों के निर्माण में तो जिस तरह से यहां मनमानी चल रही है, वैसी शायद ही कहीं हो। इनके यहां वर्षों पहले से जलप्रवाहित शौचालय बने हुुए हैं, उन्हीं के परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम शौचालय आवंटित कर बंदरबांट किया जा रहा है।
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क्षेत्र में आवास और शौचालयों के आवंटन और निर्माण में धांधली की तमाम शिकायतें हैं। अधिकारियों के निर्देश पर वे आवासों और शौचालयों की जांच कर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट करेंगे।
- अनुज कुमार सक्सेना, बीडीओ, मिर्जापुर

जांच अधिकारी पर दलाल हावी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आवासों और शौचालयोें के आवंटन और निर्माण में धांधली की जांच कर रहेे बीडीओ अनुज सक्सेना पर दलालों का भारी दबाव है। मनचाहा काम न करने पर तबादले की धमकी दी जा रही है।

ब्लाक में शौचालयों और आवासों का रिकार्ड नहीं
ब्लाक कार्यालय में पिछली पंचवर्षीय योजना से लेकर चालू योेजना में कुल कितने इंदिरा आवास और शौचालय स्वीकृत हुए हैं? इन योजनाओं पर कितना धन खर्च हुआ है? इसका रिकार्ड ब्लाक के बड़े बाबू के पास भी नहीं है। ग्राम पंचायतों के सेक्रेटरी तो पहले से ही कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं।
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