मुमुक्षु आश्रम में रामकथा का श्रवण करते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
शाहजहांपुर। मुमुक्षु महोत्सव के अंतर्गत चल रही श्री रामकथा के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को कथा व्यास विजय कौशल महाराज ने शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि शिव के गण उन्हें विवाह के लिए जब दूल्हे के रूप में सजाते हैं, तो वे आभूषणों की जगह उनके शरीर पर नाग लपेट देते हैं। साथ ही शरीर पर भस्म मल देते हैं और हाथ में डमरू दे देते हैं। शिव कहते हैं कि शरीर को कितना भी सजा लो, अंत में इसे मुट्ठीभर भस्म के रूप में ही परिवर्तित हो जाना है। जब शिव की बरात चलती है तो उसमें आगे-आगे देवतागण एवं पीछे-पीछे भूत-प्रेत शामिल होते हैं।
कथा व्यास ने एक अन्य प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब माता पार्वती भगवान शिव से श्री रामकथा सुनाने का अनुरोध करती हैं, तो शिव भावुक हो जाते हैं एवं उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। वे माता से कहते हैं कि भगवान हमेशा भक्त के वश में होते हैं। कथाव्यास ने द्रौपदी चीरहरण एवं नरसी का भात प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया।
कथा के बाद आरती डॉ. रवि मोहन एवं उनकी पत्नी डॉ. संगीता मोहन, एडीएम प्रशासन संजय पांडेय, एडवोकेट मुनेंद्र सिंह, बार संघ के अध्यक्ष एडवोकेट अजय वर्मा, महामंत्री अवधेश सिंह तोमर, सुरेश सिंघल, एसएस कॉलेज के उपप्राचार्य प्रो अनुराग अग्रवाल, प्रो प्रभात शुक्ला, प्रो. मीना शर्मा, चार्टर्ड अकाउंटेंट जी एस वर्मा के द्वारा की गई। आयोजन में डाॅ. अवनीश कुमार मिश्रा, डाॅ. राम निवास गुप्ता, डॉ. जयशंकर ओझा, डॉ. प्रमोद यादव, डॉ. प्रांजल शाही, मृदुल पटेल, डॉ. अजय वर्मा आदि का विशेष सहयोग रहा।
मुमुक्षु आश्रम में रामकथा का श्रवण करते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक