पुवायां। पुवायां क्षेत्र में एक तरफ गेहूं पक कर सोने की तरह चमक बिखेर रहा है तो मक्का और खरबूजे की खेती से गर्मी में भी हरियाली छा गई है।
पुवायां तहसील क्षेत्र में पहले मक्के की खेती बेहद कम होती थी। किसान का फोकस गेहूं, आलू, साठा धान, धान की मुख्य फसल और गन्ना की फसल पर था। गिरते भू-गर्भ जलस्तर पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने साठा धान पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद किसानों ने आलू के बाद खेत खाली होने पर साठा का विकल्प तलाशना शुरू किया और मक्का इसके लिए मुफीद साबित हुआ। वर्ष 2023 में प्रयोग के तौर पर कई किसानों ने मक्का बाेया था, तब खास लाभ नहीं हुआ था, लेकिन पिछले वर्ष मक्का में किसानों को बड़ा लाभ हुआ था। मक्का गत वर्ष प्रति एकड़ 60 से 65 क्विंटल निकला था। अच्छे रेट मिलने से मक्का प्रति एकड़ 90 हजार से एक लाख रुपये का बिक गया था।
पुवायां अगेती और उन्नत खेती के लिए मशहूर हैं। इस बार मक्का, खरबूजा और खीरा का क्षेत्रफल काफी बढ़ गया है। खेतों में साठा के स्थान पर मक्का की फसल और खरबूजा, खीरा की बेल फैली हुई हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार मक्का लगभग 13332 एकड़ में बोए जाने की तैयारी है।
पुवायां के खरबूजे के दीवाने हैं उत्तराखंड के लोग, दिल्ली तक जाता है खीरा
मक्का का क्षेत्रफल दो वर्ष से ही बढ़ा है, जबकि खरबूजा और खीरा की खेती कई वर्ष से की जा रही है। पुवायां का खरबूजा उत्तराखंड और खीरा दिल्ली तक सप्लाई होता है। खरबूजे की गुल्ला, मुस्कान आदि किस्मों के तो उत्तराखंड के लोग दीवाने हैं। बेहद मीठे होने के कारण उनकी भारी मांग रहती है। सीजन शुरू होते ही पुवायां से रोजाना वाहनों से भरकर खरबूजे को उत्तराखंड ले जाया जाता है।