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शाहजहांपुरः माफियाओं ने कायम कर रखी हैं गन्ने की अवैध खरीद मंडियां, घट रहा है गन्ना रकबा

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शाहजहांपुर। माफिया द्वारा गन्ने की अवैध खरीद जिले के किसानों के लिए कोई नई बात नहीं है। गन्ना सर्वे से लेकर पर्ची सिस्टम तक पारदर्शी व्यवस्था बनाने का दावा करने वाले सिस्टम पर गन्ना माफिया हर साल पेराई सत्र शुरू होते ही अवैध मंडियां खोलकर हावी हो जाते हैं। किसानों का गन्ना औने-पौने दामों पर खरीदने के लिए माफिया गन्ने की अवैध खरीद के लिए ऐसे स्थानों का चुनाव करते हैं, जहां कई रास्ते खुलते हों और गन्ना सहज तौर पर उपलब्ध होता रहे। तीन साल पहले निगोही-तिलहर मार्ग के डंडिया बाजार में माफिया को गन्ना खरीदते तत्कालीन डीसीओ ने पकड़ा था। जनपद के अन्य ठिकानों पर भी ऐसे तत्व सक्रिय रहते हैं। इसीलिए कटरा क्षेत्र के खैरपुर मिल्कीपुर में दो माह के अंदर दोबारा गन्ने की अवैध खरीद पकड़े जाने के मामले को अधिकारी सामान्य घटना मान रहे हैं।
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माफिया हावी होने के कारण घट रहा गन्ना रकबा
जिले में पांच वर्ष पहले तक गन्ना रकबा 62000 हेक्टेयर तक सीमित था, लेकिन बाद में शीघ्र पककर तैयार होने और अधिक चीनी परता देने वाली गन्ना प्रजातियों को प्रोत्साहित किए जाने से किसानों का रुझान गन्ना की खेती की ओर बढ़ने लगा। इसीलिए पेराई सत्र 2015-16 में 61704 हेक्टेयर तक सीमित रहा गन्ना रकबा पेराई सत्र 2017-18 में बढ़कर 86622 हेक्टेयर हो गया। यही नहीं, गत पेराई सत्र में 1.12 लाख हेक्टेयर में गन्ना फसल बोई गई थी, लेकिन रकबा बढ़ने के साथ सट्टों में गड़बड़ी करके माफिया तत्व किसानों के हक पर डाका डालने लगे। इसीलिए किसानों का गन्ना खेती से मोहभंग होने लगा। नतीजे में इस बार 150470 किसानों ने सिर्फ 98522 हेक्टेयर में गन्ने की बुवाई की। यह रकबा गत पेराई सत्र 2018-19 की तुलना में नौ फीसदी कम है।
डंडिया बाजार अवैध मंडी से मिले थे तौल कांटे
निगोही-तिलहर मार्ग पर डंडिया बाजार के एक बाग में तत्कालीन डीसीओ ब्रजेश कुमार पटेल ने छापा मारकर माफियाओं को अवैध रूप से गन्ना सेंटर चलाते पकड़ा था। मौके पर मिले दो तौल काटों की जांच कराने पर किसानों से घटतौली भी प्रमाणित हुई थी। इस मामले मेें गन्ना खरीद करने वाले बदायूं के एक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई और तिलहर चीनी मिल के कुछ अधिकारियों पर भी संदेह गहराया, लेकिन पेराई सत्र समाप्त होने के बाद मामला ठंडा पड़ गया और मिल अधिकारियों द्वारा पैरवी नहीं किए जाने पर पुलिस भी खामोश बैठ गई।
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बाहरी मिलों के क्षेत्रों में भी माफियाओं का जाल
लखीमपुर खीरी जिले की अजबापुर मिल और हरदोई की लोनी शुगर फैक्ट्री के कई क्रय केंद्र भी जनपद में खोले गए हैं। इन मिलों के बेसिक कोटा मेें भी सेंधमारी करने के लिए माफियाओं ने जाल बिछा रखा है। लोनी मिल को जाने वाले गन्ने को रोकने के लिए माफिया जलालाबाद-फर्रुखाबाद मार्ग पर हुल्लापुर चौराहा के पास जमे रहते हैं। इसी तरह अजबापुर मिल का गन्ना हड़पने के लिए दलालों ने ऊंचौलिया से लेकर रोजा के पास जमुका दोराहा तक अपने ठिकाने बना रखे हैं। किसानों से कम रेट पर लिए गए गन्ने पर दस रुपये क्विंटल की बढ़त मिलते ही माफिया आसपास के कोल्हू और क्रशरों पर गन्ना सप्लाई कर देते हैं।
माफिया की सुरागरसी में कटरा पुलिस लापरवाह
तिलहर/कटरा। खैरपुर मिल्कीपुर तिराहा पर सोमवार शाम तिलहर मिल के मुख्य गन्ना अधिकारी अमित चतुर्वेदी द्वारा गन्ने की अवैध खरीद का भंडाफोड़ किए जाने में मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के 24 घंटे बाद भी कटरा पुलिस लापरवाह बनी है। मामले के विवेचक एसआई संजीव कुमार के अनुसार अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। अभी मामले की जांच शुरू नहीं की है। उधर, सीसीओ चतुर्वेदी के अनुसार जांच से पता चला कि वहां जगन्नाथपुर का एक किसान गन्ना लेकर आया था और उसकी पहचान कराई जा रही है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों की विस्तृत जांच पेराई सत्र खत्म होने के बाद की जाती है।
गन्ना पर्चियां सेंट्रलाइज सिस्टम से जारी होने के कारण उनके सहारे मिलों में माफिया की दाल गलनी संभव नहीं है। करीब तीन हजार ऐसे किसान हैं, जिन्होंने गन्ना समितियों की सदस्यता नहीं ली है। ऐसे किसान कोल्हू और क्रशर पर गन्ना देने को स्वतंत्र हैं और इसके लिए उन्हें कोई मनाही भी नहीं है। इन्हीं किसानों से गन्ना खरीदकर माफिया अधिक रेट पर सप्लाई कर रहे हैं। सभी मिल अधिकारियों और ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षकों को अधिकृत क्रय केंद्रों के आसपास गन्ने की अवैध खरीद रोकने के निर्देश दिए गए है। - डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
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