तिलहर। संस्था सुखन तराश फाउंडेशन की ओर से रविवार की रात चौहटिया बाजार के ग्लोब पब्लिक स्कूल में कुंदरकी (मुरादाबाद) से आए शायर राशिद राहत के सम्मान में महफिल-ए-मुशायरा का आयोजन किया गया। असगर यासिर शाहजहांपुरी की अध्यक्षता में देर रात तक चली शेर-ओ-शायरी की महफिल में शायरों ने अपनी गजलों और शेरों से समा बांध दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मसूद हसन ख़ां की नात-ए-पाक से हुई। अध्यक्षता करते हुए असगर यासिर शाहजहांपुरी ने फरमाया-खुलूस यारों में कितना है आजमाऊंगा, मैं घर की राह में कुछ कैक्टस लगाऊंगा। मुख्य अतिथि शायर राशिद राहत ने समसामयिक मुद्दे उठाते हुए कहा-अब तो ख़्वाहिश है हमारी कि कोई काम मिले, थक गए मुफ्त के राशन पे गुजारा करके। गुलिस्तां खान ने कहा-हवा ने मोड़ दी कश्ती ये किस इशारे पर, पहुंचने वाले थे हम लोग बस किनारे पर।
शेर-ओ-शायरी के दौर को आगे बढ़ाते हुए शरीफ आलम कटरावी ने फरमाया-बहुत से हारने वाले यही अक्सर समझते हैं, मुकाबिल जो भी होता है उसे कमतर समझते हैं। फरीद तिलहरी, फैजान तिलहरी, शमशाद आतिफ, शिफा तिलहरी, साजिद सफदर, रेहान ताबिश, अकरम सिफत, हसन तिलहरी, हमीद खिजर आदि ने भी शेर सुनाकर वाहवाही लूटी। मास्टर शाहिद अली के संचालन में देर रात चले मुशायरे में रईस मन, मास्टर फैसल, अजीम फरीद, आरिफ खां, हाशिम, ममनून राइन, दानिश फैज आदि मौजूद रहे।