शाहजहांपुर। मानसून सीजन की शुक्रवार को हुई पहली झमाझम बरसात के साथ ही जिले की सीमा में आने वाले राजकीय राजमार्गों के जर्जर हिस्से सामान्य यातायात में अवरोध डालने लगे हैं। लखनऊ-पलिया स्टेट हाईवे पर सिंधौली के पास गहरे गड्ढे हो जाने से उनमें बारिश का पानी भर चुका है और वहां आए दिन वाहन फंस रहे हैं। इस स्थान पर बीते एक वर्ष के दौरान कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसी तरह लिपुलेख-भिंड स्टेेट हाईवे पर बलेली से निगोही और निगोही से जिंदपुरा के बीच रोड बिल्कुल खस्ताहाल हो चुकी है। मार्ग सुधरने पर यहां से पीलीभीत की 85 किमी दूरी दूरी दो घंटे मेें तय की जा सकती है, लेकिन खस्ताहाल रास्ते पर वाहन धीमी रफ्तार में चलने पर यही सफर तीन घंटे से ज्यादा वक्त ले रहा है। खास यह है कि केंद्र सरकार ने दोनों स्टेट हाईवे दो वर्ष पहले राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिए। इस कारण लोक निर्माण विभाग ने उनके क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत से हाथ खींच लिए।
लोधीपुर से कोरोकुइयां तक हाईवे खस्ताहाल
सेहरामऊ दक्षिणी से जिले की सीमा में आए लखनऊ-पलिया स्टेट हाईवे की कई साल से मरम्मत नहीं होने से डबल लेन का यह रोड महानगर में लोधीपुर से लेकर पुवायां की ओर बढ़ने पर कोरोकुइयां तक खस्ताहाल हो चुका है। हालांकि, इस हाईवे का पुत्तूलाल चौराहा से हथौड़ा चौराहा होते हुए जीआईसी तिराहा तक का हिस्सा चौड़ीकरण के लिए राज्य योजना के बजट से एक साल पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन इस पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। नेव टेक्निकल इंस्टीट्यूट के पास सड़क बिल्कुल छलनी हो चुकी है। चिनौर के आगे मूर्छा गांव के मोड़ और लक्ष्य इंस्टीट्यूट के पास गहरे गड्ढे हो चुके हैं। सिंधौली में खन्नौत पुल और भूमि विकास बैंक के सामने भी जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं। सिंधौली कसबे में समाजवादी पेट्रोल पंप के सामने बीते वर्षों में कई बार टूट चुकी सड़क का करीब दस मीटर हिस्सा गायब हो चुका है। बारिश मेें वहां जलभराव रोकने के लिए एक भट्ठा स्वामी ने ईंट के रोड़े डलवा दिए हैं, जिनसे होकर निकलने पर बाइक सवार डगमगा रहे हैं। रोड का यही हाल रजऊ से लेकर कोरोकुइयां तक है, जिससे आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं और कई मौतें भी हो चुकी हैं।
सामरिक महत्व के लिपुलेख-भिंड मार्ग की उपेक्षा
निगोही। इस राजमार्ग का सामरिक दृष्टि से बहुत महत्व है क्योंकि लिपुलेख चीन सीमा के बिल्कुल नजदीक है। सन 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के दौरान सीमा पर सैनिकों को पहुंचाने के लिए यह मार्ग बनाया गया था, क्योंकि सेना की आगरा, मथुरा, फतेहगढ़ और शाहजहांपुर छावनियां इसी रूट पर हैं। दो वर्ष पहले डबल लेन के इस हाईवे पर बजरी-कोलतार की एक परत बिछाने का काम शुरू हुआ। यह कार्य गुरगवां तक हो सका कि हाईवे को फोर लेन किए जाने की स्वीकृति मिली और मरम्मत का काम रोक दिया गया। नतीजे में रोड कई स्थानों पर खराब हो चुका है। कसबे के हमजापुर चौराहा सहित क्षेत्र के गांव गुरगवां, कजरी नूरपुर, राघवपुर सिकंदरपुर, संडा खास, पिपरिया उदयभानपुर और ऊनकलां तक जगह-जगह गड्ढे दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। वतज्मान में भारत-चीन के बीच तनातनी से युद्ध की आशंका को देखते मार्ग का निर्माण किया जा ना बेहद जरूरी हो गया है। खास यह है कि इसी मार्ग पर खनंका नाला और कैमुआ नाला के दशकों पुराने सिंगल लेन पुल यातायात मेें बाधक बन रहे हैं।