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उम्मीद की मशाल : नौकरी नहीं मिली तो खुद की इंडस्ट्री लगाकर आत्मनिर्भर बने सलमान, दूसरों को दे रहे रोजगार

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शाहजहांपुर। तिलहर तहसील के मिल्कीपुर गांव निवासी सलमान खान ने बीकॉम करने के बाद नौकरी पाने के लिए तमाम जद्दोजहद की। हर बार निराशा मिलने के बावजूद हार नहीं मानी। तय किया कि नौकरी तलाशने की बजाय खुद आत्मनिर्भर बनकर दूसरों को रोजगार देंगे। खादी ग्रामोद्योग विभाग से दस लाख का लोन लेकर ईट भट्ठा में प्रयोग होने वाले गुल्ला बनाने का काम शुरू कर दिया। अब सलमान कोरोना काल में बेरोजगार हुए लोगों का सहारा बने हुए हैं।
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परिवार में सबसे बड़े सलमान खान ने आदर्श इंटर कॉलेज से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। फिर शाहजहांपुर के जीएफ कॉलेज से 2018 में बीकॉम कर नौकरी खोजनी शुरू की। सलमान बताते हैं कि उन्होंने रेलवे की नौकरी को आवेदन किया। परीक्षा दी मगर कामयाब न हो सके। इसके बाद लेखपाल भर्ती व पुलिस भर्ती में भी निराशा हाथ लगी। लगातार कोशिशें कर थके सलमान ने कुछ अलग करने की ठान ली। उन्होंने व्यापार को अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने खादी ग्रामोद्योग योजना में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत दस लाख का लोन के लिए आवेदन किया। अधिकारियों को उनका प्रोजेक्ट पसंद आया और वर्ष 2020 में दस लाख रुपये का लोन स्वीकृत हुआ। सलमान ने रुपये हाथ में आने के बाद बायो ब्रीकेट (भट्ठे व छोटी इंडस्ट्रीज के लिए ईंधन) बनाने का काम शुरू किया। बुरादा, पुआल, मैली, भूसी आदि से बनने वाले ईंधन की सप्लाई के लिए तिलहर-कटरा के आसपास के इलाकों में संपर्क साधा। धीरे-धीरे उनका रोजगार चल निकला। अब उनकी इंडस्ट्री में बने ईंधन की बड़े पैमाने पर मांग है।
कोरोना काल में 40 से 50 लोगों को दिया रोजगार
-2019 में कोरोना की दस्तक के बाद लोग बुरी तरह से टूट चुके थे। नौकरियां जाने की वजह से घर चलाने तक का संकट था। ऐसे में सलमान की इंडस्ट्री तमाम लोगों का सहारा बनी। 2020 में सलमान ने उद्योग शुरू किया तो आसपास के लोगों को वरीयता देकर काम पर लगाया। लोगों को ऐसे समय में सलमान ने रोजगार दिया जब मजदूर परदेस से अपने गांव लौटे थे और वापसी की उम्मीद नहीं थी।
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पड़ोसी जिलों में भी सप्लाई होता है ईंधन
-सलमान ने अपने पांच बीघा खेत में इंडस्ट्री लगा रखी है। वह बताते हैं कि पीलीभीत, बरेली, सीतापुर और हरदोई में भी उनका माल सप्लाई होता है। ईंधन को बनाकर उसे सुखाने के लिए काफी जगह की जरूरत पड़ती है।
- नौकरी तलाशते हुए काफी समय बीत गया था। फिर कोरोना आया तो लोगों की नौकरियां छूट गईं। ऐसे में लगा कि अब कई साल नौकरी मिलना संभव नहीं होगी। घर की जमा-पूंजी लगाने के बाद भी उद्योग लगाने के लिए रुपयों का इंतजाम नहीं हो पाता। तब ग्रामोद्योग विभाग द्वारा लोन दिए जाने की जानकारी मिली तो आवेदन कर दिया। विभाग ने लोन स्वीकार कर दिया तो अपना कारोबार शुरू कर दिया। परिवार के अन्य सदस्य भी काम में सहयोग करते हैं। - सलमान खान
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