शाहजहांपुर। चार बेटियां पैदा होने से नाराज पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। अपराध छिपाने के लिए चाचा और पिता की मदद से शव को बहगुल नदी में फेंक दिया। अपर सत्र न्यायाधीश आशीष वर्मा ने पति को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। चाचा और पिता को सबूत मिटाने के जुर्म में चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
मिर्जापुर थाना क्षेत्र के बहरिया गांव निवासी रामप्रकाश ने 13 अगस्त 2018 को थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसने अपनी बेटी प्रेमलता की शादी 12 वर्ष पूर्व जलालाबाद के गांव मझरा निवासी गुड्डू से की थी। प्रेमलता के चार बेटियां हुई थीं। इनमें एक की मृत्यु हो गई थी। बेटियां पैदा होने की वजह से गुड्डू अपनी पत्नी से झगड़ा करता रहता था।
वह कहता था कि यह मर जाए तो वह दूसरी शादी कर ले। यह बात रामप्रकाश की छोटी बेटी किरन ने भी बताई थी। 12 अगस्त 2018 को रामप्रकाश को पानीपत में फोन से सूचना मिली कि उसकी बेटी प्रेमलता की तबीयत बहुत खराब है। इस सूचना पर वह पानीपत से अपनी बेटी की ससुराल पहुंचा। घर की कुंडी बंद थी। बाद में उसे पता चला कि प्रेमलता, गुड्डू और उसके तीनों बच्चे तीन-चार दिन से गायब हैं।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। एडीजीसी ने बताया कि पुलिस ने पति गुड्डू की निशानदेही पर प्रेमलता का शव नदी से बरामद किया था। उसके हाथ-पैर बंधे हुए थे। अदालत में गुड्डू के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने का आरोप विरचित किया गया। उसके पिता मदनपाल और चाचा वालिस्टर के खिलाफ सबूत मिटाने की धारा में मुकदमा चलाया गया।
अदालत ने पाया कि गुड्डू ने प्रेमलता की हत्या कर अपराध का सबूत छिपाने के उद्देश्य से पिता मदनपाल और चाचा वालिस्टर की मदद से उसकी लाश को बहगुल नदी में फेंक दिया गया। अपर सत्र न्यायाधीश ने गुड्डू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मदनपाल और वालिस्टर को चार-चार वर्ष के कारावास की सजा से दंडित किया।