एक अप्रैल से शुरू हो रहे शैक्षणिक सत्र में 14 वर्ष तक के बच्चों को स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकित कराने में अभिभावकों को भी अहम भूमिका निभानी होगी। जागरूक अभिभावक अपने और पास-पड़ोस के बच्चों को स्कूल तक लाने के महत्वपूर्ण कार्य में सहायता कर सकते हैं। सामाजिक सहयोग के बिना स्कूल चलो अभियान का उद्देश्य पूरा होना मुश्किल है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत छह से लेकर 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य रूप से शिक्षा देने का प्रावधान है। सर्व शिक्षा अभियान सामुदायिक सहभागिता के जिला समन्वयक वीपी सिंह ने कहा कि बच्चों को शिक्षित करने के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें बच्चों के माता-पिता को भी अपनी सहभागिता निभानी होगी। फिर भी बड़ी संख्या में बच्चों का नामांकन छूट जाने से ड्रॉप आउट बच्चे रह जाते हैं। ड्रॉप आउट बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से कक्षाओं में प्रवेश कराने के अलग से कक्षाएं संचालित की जाती हैं, लेकिन नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ वाला ही रहता है। बच्चों को शिक्षित करने और शत-प्रतिशत नामांकन के लिए अभिभावकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अभिभावकों के सहयोग के बिना बच्चों का नामांकित करके रोज स्कूल लाना मुश्किल काम है।