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Shahjahanpur News: बाढ़ से घिरे मकान, गर्दन तक पानी भरा होने से निकलना दूभर

Thu, 01 Oct 2026 01:00 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर ​निकलता युवक। संवाद
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शाहजहांपुर। गर्रा और खन्नौत नदियों का जलस्तर मामूली घटने के बाद भी शहर के निचले इलाकों सुभाषनगर व लोधीपुर में बाढ़ की स्थिति जस की तस बनी हुई है। बुधवार को पानी से घिरे मकानों में लोग फंसे रहे। कई जगह गलियों में इतना पानी भरा है कि लोगों के लिए घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। प्रभावित लोगों का आरोप है कि अब तक प्रशासन की ओर से राहत सामग्री या मदद के लिए कोई प्रतिनिधि उनके बीच नहीं पहुंचा है।
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मंगलवार रात आठ बजे से बुधवार की सुबह आठ तक तक गर्रा नदी का जलस्तर दस सेमी घटा है। गर्रा 45 सेमी नीचे आई है। इसी तरह खन्नौत नदी भी पांच सेमी कम हुई, लेकिन अभी भी खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदियों का जलस्तर घटने के बावजूद निचले इलाके में पानी का उतार नहीं हुआ है। लोगाें के मकान अभी तक पानी से घिरे हुए हैं।
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लोधीपुर में मकान पानी से घिरे, बेबसी में फंसे लोग
खन्नौत नदी का जलस्तर पांच सेंटीमीटर कम होने के बाद भी लोधीपुर इलाके के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। निचले इलाके की गलियों में अब भी पानी बह रहा है। बड़ी संख्या में लोग घरों में फंसे हैं और मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए उन्हें बाढ़ के पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। जलभराव के कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित है। कुछ मकानों के निचले तल तक पानी पहुंचने के बाद परिवारों ने छतों का सहारा ले लिया है।
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सांप का भी डर, लोग कर रहे निगरानी
बुधवार को मौके पर कई लोग मिले। कोई वाइपर के सहारे घर के अंदर घुस रहे पानी को रोकने की कोशिश कर रहा था तो कोई हाथ में डंडा लिए दरवाजे पर पहरा दे रहा था। पानी के साथ जहरीले कीड़े और सांप घर में न घुस आएं, इस डर से लोग लगातार निगरानी कर रहे हैं। जलभराव के कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। जरूरी सामान लेने के लिए भी उन्हें नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

10,962 क्यूसेक पानी छोड़ा गया
-गर्रा नदी में दियूनी बैराज से 4,762 क्यूसेक और कठिना नदी से 6,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी बृहस्पतिवार तक पहुंचने की संभावना है। इससे गर्रा नदी का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। वहीं, खन्नौत नदी में करीब 4,200 क्यूसेक पानी पहुंच रहा है।
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फोटो 20
-हमारे घर के सामने तक पानी आ जाता है। सड़क नीची और नाली का बहाव ठीक नहीं होने के कारण समस्या आ रही है। दो फुट तक सड़क को ऊंचा किया जाए। - अवधेश कुमार
लोधीपुर
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फोटो 19
-बाढ़ के कारण परेशानी आ रही है। कई दिन हो गए हैं, लेकिन पानी कम नहीं हुआ है। अब उम्मीद लग रही है कि पानी कम होगा। तभी राहत मिल सकेगी। - गुड्डू, लोधीपुर

फोटो 18

-मकान चारों तरफ से बाढ़ से घिरा है। ऐसे तो मकान की नींव कमजोर हो जाएगी। नाव के सहारे ही मुख्य सड़क पर पहुंच पाते हैं। बच्चे घरों में कैद हो गए हैं।
अंशुल, सुभाषनगर

फोटो 17
पिछले तीन साल से बाढ़ से जूझ रहे हैं। मकान की निगरानी करनी पड़ रही है। पानी में सांप आदि के आने की संभावना बनी रहती है। पति भी बाढ़ के चलते स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
- बीना दीक्षित, सुभाषनगर

रामगंगा में उफान बढ़ने से 24 तटीय गांव चौतरफा बाढ़ से घिरकर बने टापू
फोटो: 15,16
जलालाबाद। रामगंगा में उफान बढ़ने से बुधवार सुबह विकराल स्थिति हो गई। रामगंगा और उसके साथ बह रही बहगुल नदी के किनारे बसे करीब 24 से ज्यादा तटीय गांव पानी से चौतरफा घिरकर टापू में तब्दील हो गए। इससे वहां के लोगों का जीवन यापन संकट ग्रस्त हो गया है।
जनपद की सीमा पर स्थित अल्हागंज क्षेत्र के डबरी घाट पर मंगलवार रात आठ बजे की तुलना में बुधवार को सुबह आठ बजे तक रामगंगा का जलस्तर आठ सेमी बढ़कर 137.80 मीटर होने से नदी खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर पहुंच गई है। रामगंगा के साथ ही बहगुल नदी भी भारी उफान पर है। इस वजह से तटीय गांवों की स्थिति 15 दिन पहले आई बाढ़ जैसी बन गई है। अल्हागंज से लेकर क्षेत्र के खंडहर गांव तक करीब 20 किमी के दायरे में बसे 24 से ज्यादा गांवों रामगंगा के निशाने पर होने से वहां के हालात बदतर होते जा रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हाल थाथरमई, उइला, हवा मड़ैया, संगाहा, कुंडरा, पहाड़पुर, मड़ैया गुजरान आदि उन गांवों का है जो रामगंगा और बहगुल के बीच बसे हैं। इस मार्ग पर तिकोला पुल से करीब एक किमी आगे बनी पुलिया के ऊपर भी पानी आ जाने से वहां से आवागमन खतरनाक हो गया है।
तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि सभी बाढ़ चौकियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने की सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। तहसीलदार के अनुसार आवागमन के लिए बाढ़ से घिरे कई गांवों को नाव और मोटरबोट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
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नदियों के जलस्तर में गिरावट हो रही है। जल्द स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। सभी प्रभावित क्षेत्रों में नजर रखी जा रही है। -अरविंद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

जलालाबाद में तिकोला घाट के आगे पानी में डूबी पुलिया से बाइक लेकर निकलता युवक। संवाद

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