पुवायां (शाहजहांपुर)। नगर की बेशकीमती जगह पर वर्षों से रह रहे परिवार का घरेलू सामान सड़क पर फेंक दिया गया। जिस कमरे में परिवार के लोग रहते थे उसे भी तोड़ दिया गया। यह सब पुलिस की मौजूदगी में किया गया है। इंस्पेक्टर का कहना है कि नायब तहसीलदार ने एसडीएम का आदेश बताकर पुलिस सुरक्षा देने को कहा था। पुलिस केवल सुरक्षा के लिए गई थी। कब्जा हटवाने का पुलिस से कोई लेना देना नहीं है। एसडीएम ने भी मकान गिराने का आदेश देने से इन्कार किया है।
कस्बे के मोहल्ला गांधीनगर में कुछ जमीन पड़ी है। जमीन को पुवायां के एक व्यापारी अपनी बताते हैं। वहीं जमीन पर रहने वाले संतोष अवस्थी ने बताया कि उन्होंने जमीन खरीदी थी लेकिन नाम नहीं करा पाने के कारण विवाद होता रहता है। जमीन पर वह कई वर्ष से परिवार सहित रह रहे हैं। इसको लेकर न्यायालय में वाद भी चल रहा है। बृहस्पतिवार शाम काफी पुलिस फोर्स उनके घर पहुंची और परिवार के लोगों को थाने में बैठा दिया। शाम को पुलिस के साथ राजस्व विभाग के अधिकारी उनके घर पहुंचे और उनकी मौजूदगी में दूसरे पक्ष के तमाम लोगों ने उनका सामान तोड़फोड़ कर सड़क पर फेंक दिया। घर जेसीबी से ढहा दिया गया, लेकिन पुलिस और राजस्वकर्मी मूकदर्शक बने रहे। घर ढहाने और सामान को सड़क पर फेंकने के बाद परिवार के लोगों को थाने से छोड़ा गया। वे लोग बाद में रिपोर्ट दर्ज कराने थाने गए, लेकिन वहां दूसरे पक्ष के लोग पहले से मौजूद थे और पुलिस ने उनकी एक न सुनी।
रातभर परिवार के लोग खुले में सड़क पर पड़े रहे। दूसरे दिन कई संगठनों के लोग मौके पर पहुंचे और पीड़ितों से मामले की जानकारी ली। दूसरे पक्ष के लोग भी मौके पर डटे रहे। मामला बिगड़ता देख पुलिस और प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। कब्जा हटवाने को लेकर अपना-अपना पल्ला झाड़ने लगा है। दूसरे पक्ष का कहना है कि जमीन उनकी है। उन लोगों ने जमीन संतोष अवस्थी को पटके पर दी थी। बाद में संतोष जमीन पर रहने लगे और अब जमीन खाली नहीं कर रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने प्रशासन को प्रार्थनापत्र दिया था। जिस पर प्रशासन ने कार्रवाई कर जमीन खाली कराई है। जमीन पर कहीं कोई मुकदमा नहीं चल रहा है। तोड़फोड़ और सामान फिंकवाने की बात निराधार है। नायब तहसीलदार सृजित निगम से मामले की जानकारी के लिए कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव ही नहीं किया।
मामले को मैनेज करने में जुटे लोग
घर गिराने के मामले में कुछ लोग पीड़ित परिवार पर मामले को रफा-दफा कराने का दबाव बनाते रहे। पूरे दिन पीड़ित परिवार को बताया जाता रहा कि अब कुछ नहीं हो सकेगा। इस कारण उनका कार्रवाई न करना ही सही है। उधर पीड़ित का कहना है कि उनके साथ अन्याय हुआ है। वह मामले को मुख्यमंत्री तक ले जाकर कार्रवाई कराएंगे। घर गिराते समय किसी ने भी उनकी मदद की नहीं सोची और अब हितैषी बनने का दिखावा किया जा रहा है।
मेरे पास प्रार्थना पत्र आया था। इसकी जांच नायब तहसीलदार को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। मकान किसने गिरवाया, इसकी जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच होगी। हिमांशु उपाध्याय, एसडीएम पुवायां
मेरे पास नायब तहसीलदार के साथ राजस्व टीम आई थी। उन्होंने फोर्स मांगी। सुरक्षा व्यवस्था के उद्देश्य से पुलिस भेजी गई थी। पुलिस का मकान ढहाने की घटना से कोई संबंध नहीं है। संतोष अवस्थी और उनके परिवार के लोग खुद थाने आए थे। पुलिस के सामने घर नहीं गिराया गया है।
प्रदीप कुमार राय, थाना प्रभारी पुवायां
खुटार में भी ढहाए गए थे गरीबों के आशियाने
पुवायां। लगभग दो माह पूर्व खुटार के गांव हिटौटा में प्लॉटिंग करने वाले की मिलीभगत से लेखपाल और पुलिस ने गरीबों के कई घर जेसीबी से गिरवा दिए थे। अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से उठाया था तो बैकफुट पर आए पुलिस, प्रशासन ने प्लॉटिंग करने वाले पर रिपोर्ट दर्ज की थी। लेखपाल पर विभागीय जांच बैठाई गई थी। अब पुवायां में बिना कोर्ट की अनुमति के घर ढहा दिया गया। संवाद