खुटार क्षेत्र में गेहूं काटते किसान (फाइल फोटो)
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शाहजहांपुर। मौसम के कहर का सीधा असर इस बार गेहूं की औसत उत्पादकता में कमी के तौर पर देखने को मिल रहा है। गत वर्ष जिले में प्रति हेक्टेयर 40 क्विंटल गेहूं उपज मिली थी, लेकिन इस बार न्याय पंचायत स्तर पर कराई गई क्रॉप कटिंग मेें गेहूं की औसत उत्पादन में करीब पांच फीसदी कमी आने की आशंका है। हालांकि, अभी क्रॉप कटिंग के पुख्ता नतीजे नहीं मिले हैं, लेकिन कृषि वैज्ञानिक और विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि इस बार प्रति हेक्टेयर दो क्विंटल गेहूं कम पैदा होने के लक्षण दिख रहे हैं।
उत्पादन में कमी जिले के सभी ब्लॉकों में नहीं दिख रही है, लेकिन उन क्षेत्रों में उत्पादन कम हुआ है, जहां पहले भी गेहूं पैदावार औसत से कम रही अथवा गेहूं की बुआई 15-20 दिन देर से की गई। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुसार गेहूं दाना को परिपक्व होने के लिए 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल माना जाता है। इससे अधिक तापमान होने पर बालियों में पड़ा दाना परिपक्व होने के बजाय उसका दूध तेजी से सूखने लगता है। इस वर्ष मार्च से ही गर्मी सामान्य से अधिक होने लगी। इस कारण वातावरण में आर्द्रता का स्तर भी तेजी से कम हुआ और इसका असर गेहूं की उत्पादकता मेें कमी के तौर पर दिखना स्वाभाविक है।
समय से खाद और सिंचाई पर उत्पादन सामान्य
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक का कहना है कि जिन किसानों ने गेहूं फसल की उचित देखभाल करने के साथ समय से खाद और सिंचाई की है, उनके खेतों में गेहूं उत्पादन सामान्य हुआ है। बताया कि पुवायां तहसील में नाहिल, बंडा ब्लॉक में धीमरपुरा, तिलहर तहसील मेें निगोही स्थित राजकीय प्रक्षेत्र में क्रॉप कटिंग कराने पर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की औसत उपज मिली है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में उत्पादन कम होने की सूचनाएं मिली हैं। उनका मानना है कि सभी न्याय पंचायतों से क्रॉप कटिंग की रिपोर्ट मिलने के बाद ही सही आकलन हो सकेगा।
जिन किसानों ने दो-तीन सप्ताह देर से गेहूं बोया है, वहां उत्पादकता में ज्यादा कमी देखी गई है। भावलखेड़ा क्षेत्र में सीतापुर मार्ग के किनारे स्थित गांवों के कई खेतों में प्रति हेक्टेयर सिर्फ 28 से 30 क्विंटल गेहूं निकला है। इस दृष्टि से पुवायां, बंडा, खुटार आदि बेहतर पैदावार देने वाले उपजाऊ क्षेत्रों में गेहूं उत्पादकता पर मौसम का कोई असर नहीं दिखा। विभाग के पास इस तरह का कोई रिकार्ड नहीं है कि कितने क्षेत्रफल में देर से बुआई हुई। इसके बावजूद जनपद स्तर पर गेहूं उत्पादकता 38 से 39 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिलने का अनुमान है। -धीरेंद्र सिंह, उप निदेशक (कृषि प्रसार)