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जांच कमेटी ने अब तक नहीं किया पीड़ित से संपर्क

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शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के दौरान गर्भवती महिला के पेट में कपड़ा छूटने के मामले में जांच कर रही टीम ने अब तक पीड़ित से संपर्क नहीं किया है।
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जनवरी में तिलहर क्षेत्र के गांव रमापुर उत्तरी निवासी मनोज कुमार ने गर्भवती पत्नी को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने पेट के अंदर कपड़ा छोड़ दिया। आपरेशन के दौरान महिला की एक आंत भी कट गई। बाद में तबीयत खराब होने पर एक निजी मेडिकल कॉलेज में महिला के पेट से कपड़ा बाहर निकाला गया।
महिला के पिता राधेश्याम का आरोप है कि 14 जुलाई को दोबारा नीलम को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। जहां 24 घंटे भर्ती करने के बाद बाहर जाने की सलाह दी गई। उसके बाद मरीज को रेफर कराकर 15 जुलाई को लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया, जहां सोमवार को नीलम के पेट में कटी हुई आंत का ऑपरेशन हुआ। आपरेशन के बाद नीलम को वेंटीलेटर पर रखा गया। चौथे दिन नीलम ने आंखें खोली हैं। पिता ने बताया कि सात दिन में करीब 70-80 हजार रुपये की दवाएं बाहर से ला चुके हैं। ऑपरेशन के नाम पर कोई रुपये नहीं लिए गए।
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उन्होंने कहा कि डीएम के संज्ञान लेने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने जांच के आदेश दिए। तीन सदस्यीय टीम बनाई गई पर अब तक किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं किया है। पिता का कहना है कि किसी भी कीमत पर चुप नहीं रहेंगे। बेटी को इस हालत में पहुंचाने वाले डॉक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूर करवाएंगे।
यहां बता दें राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने डीएम के रिपोर्ट मांगने पर पहले महिला सीएमएस डॉ. अशोक रस्तोगी को जांच दी थी, लेकिन उन्होंने जांच करने से मना कर दिया। उसके बाद मंगलवार को प्राचार्य ने तीन सदस्यीय टीम बनाकर एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी।
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इस मामले में प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि टीम जांच कर रही है। एक सप्ताह में रिपोर्ट डीएम को दे दी जाएगी। संवाद
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