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मेडिकल कॉलेज में उमड़ रही मरीजों की भीड़, आक्सीजन और बेड की मारामारी

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शाहजहांपुर। कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ राजकीय मेडिकल कॉलेज में सांस के मरीजों की संख्या में बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज में पहुंचने वाले मरीज ऑक्सीजन और बेड के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। कोरोना के डर से घबराए मरीजों और उनके तीमारदारों को डॉक्टरों या कर्मचारियों को यह समझा पाना मुश्किल है कि उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है। केवल दवाओं से उन्हें सांस की दिक्कत दूर हो सकती है।
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कोरोना संक्रमित मरीजों की लगातार बढ़ती से राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर से लेकर बेड और ऑक्सीजन तक के लिए मारामारी मची है। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर का आलम यह था कि कई मरीज स्ट्रेचर पर लेटे थे। एक सिलिंडर से कई मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही थी। यानी कुछ देर एक मरीज को और इसके बाद कुछ देर दूसरे मरीज को ऑक्सीजन दी जा रही थी। ट्रामा सेंटर पहुंचने वालों में सबसे ज्यादा सांस के मरीज हैं। मरीज के ट्रामा सेंटर में पहुंचते ही तीमारदार ऑक्सीजन की आवश्यकता बताते हैं। तीमारदारों के ऑक्सीजन लगाने को कहने पर ट्रामा सेंटर में मौजूद डॉक्टर और कर्मचारी अपनी बेबसी बयां करने लगते हैं। ऑक्सीजन की किल्लत देख कुछ तीमारदार अपने मरीज को लेकर चले जाते हैं, कुछ लोग अपनी पहुंच के हिसाब से मंत्री, नेता या अधिकारियों से फोन कराकर दबाव बनाकर व्यवस्था करा लेते हैं। ऑक्सीजन को लेकर मेडिकल कॉलेज में कई बार बवाल हो चुका है।
ट्रामा सेंटर में रजनी को नहीं मिला स्ट्रेचर, गोद में लेकर बैठा रहा भाई
तिलहर क्षेत्र के खनपुरा निवासी रजनी को कुछ दिन से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। शुक्रवार को उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर ले जाया गया। मगर वहां रजनी को लिटाने स्ट्रेचर तक नहीं मिला। रजनी की हालत बिगड़ती जा रही थी। भाई हरिपाल के मुताबिक मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों ने बताया कि डॉक्टर साहब व्यस्त हैं, कुछ देर बाद देख पाएंगे। बेड खाली नहीं है। स्ट्रेचर नहीं मिला तो भाई रजनी को गोद में उठाकर ट्रामा सेंटर के बाहर सीढ़ियों पर बैठाने को ले गया। तभी उन्हें होमगार्ड ने फटकार दिया। गार्ड बोला- यह मेरे बैठने की जगह है। यहां कोई नहीं बैठ सकता। मजबूर भाई रजनी को गोद में लिए परिसर में जमीन पर बैठ गया। पिता ने भी रजनी को सहारा दिया।
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कैबिनेट मंडी के पीए ने फोन किया तो हरकत में आए मेडिकल कॉलेज कर्मचारी
एक बुजुर्ग को गंभीर हालत में एंबुलेंस से राजकीय मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां उन्हें स्ट्रेचर तक नहीं दिया गया। साथ में पहुंचे तीमारदार ने कर्मचारियों से एंबुलेंस में लेटे मरीज को देखने के लिए कहा, लेकिन कर्मचारियों ने मना कर दिया। कुछ देर बाद प्रदेश के कैबिनेट मंत्री पीए का फोन सीएमएस के पास पहुंचा। कहीं तब जाकर मेडिकल कॉलेज का स्टॉफ हरकत में आया। फिर एंबुलेंस में ही मरीज को देखा गया और आक्सीजन की कमी बताई। हालांकि तीमारदारों ने आक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था निजी तौर पर करने पड़ी। इसके बाद स्ट्रेचर पर लिटाकर मरीज को ऑक्सीजन लगाई गई।
निजी अस्पताल में नहीं मिला आक्सीजन, ट्रामा सेंटर में मिला इलाज
लखीमपुर के पसगवां निवासी 62 वर्षीय जगदीश को हल्का बुखार होने के साथ सांस लेने में दिक्कत हुई। बेटा अरुण कुमार उन्हें पहले यहां शहर में अंटा चौराहा के पास स्थित एक निजी अस्पताल ले गया। वहां डॉक्टर ने आक्सीजन कम बताया, लेकिन आक्सीजन देने से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद मरीज को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां इलाज मिलने के बाद जगदीश की हालत में कुछ सुधार हुआ।
24 घंटे में राजकीय मेडिकल कॉलेज में 700 आक्सीजन सिलिंडर की खपत हो चुकी है। कोविड अस्पताल के एल टू आइसोलेशन वार्ड में 200 जंबो सिलिंडर और सामान्य मरीजों पर 500 ऑक्सीजन के छोटे सिलिंडर खर्च हुए। बृहस्पतिवार दोपहर एक बजे तक ऑक्सीजन के 114 खाली सिलिंडर गाड़ी में भरकर प्लांट भेजे गए। राजकीय मेडिकल कॉलेज के पास ऑक्सीजन के भरे हुए 133 जंबो सिलिंडर और 90 छोटे सिलिंडर स्टॉक में हैं।
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सुभाष कन्नौजिया, स्टाक प्रभारी, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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