शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीज के तीमारदारों के मारपीट करने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। बृहस्पतिवार रात करीब एक बजे एक मरीज के तीमारदारों ने मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी को पीट दिया। कर्मचारी का कसूर सिर्फ इतना था कि वह मोर्चरी तक शव ले जाने लिए मरीज से स्ट्रेचर मांग रहा था। इतनी बात पर गुस्साए मरीज के तीमारदारों ने हंगामा करने के साथ मारपीट की। ट्रामा सेंटर के कर्मचारियों को खुद को बचाने के लिए मौके से भागना पड़ा। बाद में कर्मचारियों ने सीएमएस से मिलकर घटना की जानकारी दी और सुरक्षा की गुहार लगाई।
बृहस्पतिवार रात राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर से एक महिला का शव मोरचरी तक ले जाना था। कर्मचारी ने ट्रामा सेंटर में भर्ती एक मरीज से कुछ देर के लिए स्ट्रेचर देने को कहा। बताते हैं कि कर्मचारी ने उस मरीज के लेटने के लिए व्यवस्था भी कर दी थी। बावजूद इसके मरीज के तीमारदारों ने स्ट्रेचर देने से मना कर दिया। इसी को लेकर कर्मचारी और मरीज के तीमारदारों के बीच कहासुनी होने लगी। कहासुनी के दौरान तीमारदारों ने मेडिकल कॉलेज कर्मचारी को पकड़ लिया और पिटाई कर दी। उसके कपड़े फाड़ दिए। तीमारदारों का आक्रोश देख ट्रामा सेंटर में मैजूद कर्मचारी इधर-उधर भाग गए। तीमारदारों के चंगुल से दूटने के बाद पीड़ित कर्मचारी सचिन ने सीएमएस डॉ. एयूपी सिन्हा से मिला और लिखित प्रार्थना पत्र देकर मारपीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पहले भी कई बार हो चुकी है मारपीट
राजकीय 21 अप्रैल को कांट क्षेत्र में सड़क हादसे में घायल युवक की ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस पर परिजन ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रामा सेंटर में जमकर हंगामा किया था। कर्मचारी को मौके से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी थी। उसी रात राजकीय मेडिकल के इमर्जेंसी वार्ड में इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद जमकर बवाल हुआ था। मरीज के परिजन ने इमर्जेंसी वार्ड में जमकर तोड़फोड़ और कर्मचारियों से अभद्रता की थी। 23 अप्रैल को होल्डिंग एरिया में मरीज की मौत के बाद तीमारदारों ने कर्मचारियों से मारपीट की थी।
रात में ट्रामा सेंटर में एक कर्मचारी के साथ मरीज के तीमारदारों ने मारपीट की थी। जानकारी होते ही अस्पताल चौकी पुलिस को सूचना दी गई थी। उसके मामला शांत हो गया। - डॉ. एयूपी सिंहा, सीएमएस राजकीय मेडिकल कॉलेज
मुख्यमंत्री के निर्देश भारी है जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की मनमानी
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश हैं कि जिले के अधिकारी सीयूजी नंबर पर आने वाली हर कॉल उठायेंगे। मगर मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिले अधिकारियों की मनमानी भारी पड़ रही है। कोतवाल, सीओ से लेकर आला अधिकारी तक सीयूजी नंबर नहीं उठाते हैं।