शाहजहांपुर। अचानक तबीयत खराब होने के बाद शहर काजी सैय्यद मसूद हसन का बुधवार को एक निजी अस्पताल में इंतकाल हो गया। उन्हें बुखार आने के साथ सांस लेने में दिक्कत हुई थी। परिजन पहले उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज ले गए थे। परिवार वालों आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में शहर काजी को ऑक्सीजन नहीं मिली। वहां का स्टॉफ 28 मरीजों के बाद नंबर आने की बात कह रहा था। इसके बाद उन्हें प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ा। हालांकि मेडिकल कॉलेज आक्सीजन की कमी होने से इंकार कर रहा है।
करीब 76 वर्षीय शहर काजी सैय्यद मसूद हसन मोहल्ला झंडा कला के रहने वाले थे। परिजन के मुताबिक उन्हें सांस लेने की दिक्कत होने पर 15 अप्रैल को कोरोना जांच कराई थी। हालांकि जांच रिपोर्ट में कोरोना संक्रमण नहीं आया था। पिछले दो दिनों से शहर काजी को हल्का बुखार होने के साथ सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। मंगलवार को पूर्वाह्न करीब 11 बजे तबीयत कुछ ज्यादा खराब होने पर उन्हें दोपहर करीब 12 बजे राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर ले जाया गया। बेटे सैय्यद सैफ का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में शहर काजी को ऑक्सीजन नहीं मिली। मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों ने 28 मरीजों को आक्सीजन सिलिंडर देने के बाद शहर काजी का नंबर आने की बात कही। इससे मजबूर होकर शहर काजी को मेडिकल कॉलेज से निकालकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वहां ऑक्सीजन लगने पर शहर काजी की हालत में कुछ सुधार हुआ। मगर बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और कुछ देर बाद उनका इंतकाल हो गया।
इसके बाद शहर काजी का शव उनके आवास ले जाया गया। इसका पता लगने पर तमाम नामचीन लोग शहर काजी के अंतिम दीदार को पहुंचे। शाम करीब चार बजे झंडा कब्रिस्तान में नमाज ए जनाजा हुई, और इसके बाद शहर काजी को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। शहर काजी सैय्यद मसूद हसन की पत्नी शाहनवाज बानो का 2008 में इंतकाल हो गया था। उनके बेटे सैय्यद सैफ हसन इस्लामियां स्कूल में शिक्षक है। बेटी अरीज की शादी लखनऊ में हुई, जो अब अमेरिका में है। छोटे भाई सैय्यद मंजूर हसन का कहना हे कि पहली बार ऐसा देखा गया कि शहर काजी को इलाज के लिए स्ट्रेचर और बेड तक नहीं मिला। 15 मिनट तक बीमारी की हालत में जमीन पर बैठकर आक्सीजन सिलिंडर लगने का इंतजार करते रहे।
बेटे सैय्यद सैफ हसन का कहना हे कि राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में इलाज के नाम पर कुछ नहीं किया गया। वहां बेड तो छोड़िए स्ट्रेचर तक नहीं दिया गया था। शहर काजी को जमीन पर लिटाया गया। मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी कुछ भी सुनने को राजी नहीं थे। काफी गुहार लगाने के बाद स्टॉफ ने 28 मरीजों को आक्सीजन देने के बाद नंबर आने की बात कही। कर्मचारी ऑक्सीजन सिलिंडर का स्टाक खत्म होने की बात भी कह रहे थे। वहां 15 मिनट जमीन पर लिटाने के बाद ऑक्सीजन मिलने की उम्मीद खत्म होने पर शहर काजी को प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया।
150 साल से खानदान में रहा है शहर काजी का पद
शहर काजी सैय्यद मसूद हसन के पूर्वज ईरान के तिरमिज से आये थे। परदादा सैय्यद सरफराज अली भी शहर काजी रहे थे। उन्होंने 1857 के स्वाधीनता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। जानकारों के मुताबिक शहर काजी सैय्यद मसूद हसन के खानदान में पिछले करीब 150 साल से शहर काजी का पद है। अब उनके बेटे सैय्यद सैफ हसन शहर काजी का पद संभाल सकते हैं।
28 मरीजों के बाद आक्सीजन दी जाएगी स्टॉफ ने ऐसा कहा हो यह हो नहीं सकता। क्योंकि जिस मरीज को आक्सीजन की आवश्यकता होती है उसे आक्सीजन दी है। इतना जरूर है कि मरीज तक आक्सीजन सिलिंडर पहुंचने में कुछ देरी हुई हो। क्योंकि हाल के दिनों में मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा हो गई है। सभी को देखना पड़ता है। - अभय कुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज