शाहजहांपुर। कोरोना महामारी के चलते शहर में मौतों का आंकड़ा करीब 10 गुना बढ़ गया है। आम दिनों में शहर में खन्नौत नदी के घाट पर बने मोक्ष धाम और गर्रा स्थित श्मशान भूमि पर रोज एक-दो दो चिताएं जलती थीं। वहां इन दिनों प्रतिदिन 15 से 20 चिताएं जल रही हैं। इनमें आधी के करीब ऐसे लोगों की चिताएं हैं, जिनका अंतिम संस्कार कोविड नियमों के तहत किया गया। हालात यह हैं कि श्मशान भूमि में चिताएं जलाने के लिए चबूतरे कम पड़ रहे हैं, जिससे कइयों का अंतिम संस्कार नीचे फर्श पर करना पड़ रहा है।
शहर में दो श्मशान भूमि हैं। इनमें एक खन्नौत नदी के घाट पर मोक्ष धाम नाम से बनी है। दूसरी श्मशान भूमि गर्रा नदी के घाट पर बनी है। इन दोनों श्मशान भूमि की देखरेख मुख्य रूप से रामवली करते हैं। रामवली ने बताया कि पहले रोज प्रति दिन एक या दो अंतिम संस्कार होते थे। मगर कोरोना महामारी फैलने के बाद शव पहुंचने का आंकड़ा कई गुना बढ़ गया है। इससे अंतिम संस्कार के लिए लाइन लग रही है। शवों की संख्या बढ़ने से चिताओं के लिए चबूतरे कम पड़ रहे हैं। हालात को देखते हुए श्मशान भूमि में चिताओं के लिए नए चबूतरे बनाए जा रहे हैं।
रामवली के मुताबिक सोमवार को खन्नौत मोक्ष धाम पर अंतिम संस्कार के लिए 19 शव लाए गए थे। इनमें पांच का अंतिम संस्कार कोविड नियमों के तहत किया गया। मंगलवार को वहां 17 शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जिनमें चार का अंतिम संस्कार कोविड नियमों के तहत किया गया। इसी तरह गर्रा नदी स्थित श्मशान भूमि सोमवार को 23 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इनमें 13 का अंतिम संस्कार कोविड नियमों के तहत किया गया। मंगलवार को शाम पांच बजे तक वहां 14 शव लाए जा चुके थे, जिनमें छह का अंतिम संस्कार कोविड नियमों के तहत किया गया। कुछ ऐसे ही हालात कब्रिस्तानों का भी है।
23 साल बाद नए चबूतरे बनाने की पड़ी जरूरत
खन्नौत और गर्रा नदी किनारे स्थित श्मशान घाटों पर पहुंचने वाले शवों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि अंतिम संस्कार के लिए चबूतरे कम पड़ गए। मंगलवार को श्मशान घाटों पर नए चबूतरे बनाने का काम शुरू कर दिया गया। रामवली ने बताया कि खन्नौत नदी मोक्षधाम पर 23 साल बाद नए चबूतरे बनाने की जरूरत पड़ी है। अभी तक खन्नौत मोक्षधाम पर 16 चबूतरे थे। अब आठ चबूतरे और बनाए जा रहे हैं। इसी तरह गर्रा नदी किनारे बने श्मशान घाट पर 13 चबूतरे थे वहां चार नए चबूतरे बनाए जा रहे हैं।