शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग के जरिये रखे गए 28 स्टाफ नर्सों को नौकरी से हटा दिया गया। इसके विरोध में स्टॉफ नर्सों ने सोमवार को मेडिकल कॉलेज परिसर में में इकट्ठे होने के बाद जमकर हंगामा किया। प्रदर्शन करने वाले कॉलेज प्रशासन पर छह माह का वेतन न देने का आरोप लगा रहे थे। हंगामे के बाद डीएम को संबोधित ज्ञापन प्राचार्य डॉ अभय सिन्हा को सौंपा गया।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग के जरिये 28 स्टाफ नर्सों को रखा गया था। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सोमवार को आउट सोर्सिंग पर रखे स्टॉफ नर्सों की सेवा खत्म कर दी गई। इसका पता लगने पर नौकरी से हटाए गए स्टाफ नर्स सोमवार सुबह राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक भवन के सामने एकत्र हुए और नारेबाजी कर हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि कोविड-19 जैसी महामारी में 28 स्टॉफ नर्सों को निकाला जाना और छह माह से वेतन न दिया जाना बेहद निंदनीय हैं। ऐसे हालात में उन्हें जीविका चलाना मुश्किल हो गया है। आरोप है कि उन्हें नियुक्त किए जाने के बाद केवल सितंबर का वेतन दिया गया। अक्तूबर 2020 से अब तक उन्हें वेतन ही नहीं दिया गया। इससे उनके परिवार के भरण पोषण का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई तो मामले की शिकायत शासन से की जाएगी। हंगामे के बाद सभी नर्सिंग स्टाफ ने जाकर प्राचार्य से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर नेहा, निहारिका सिंह, प्रिया श्रीवास्तव, संजीव कुमार, नईम अली, देवेंद्र, अनुपम देवी, आरती देवी, आरती तिवारी, नेहा, कृष्णपाल, प्रीति शर्मा, लक्ष्मी, प्रिया पटेल, निधि शर्मा, सोनम विकास आदि मौजूद रहे।
किसी स्टॉफ नर्स को बर्खास्त नहीं किया गया है। सभी को एक निश्चित समय के लिए नौकरी पर रखा गया था। आगे यदि उनकी सेवाओं की आवश्यकता होगी तो बुला लिया जाएगा। आरोप निराधार हैं। - डॉ अभय सिन्हा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर