शाहजहांपुर। बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए दस्त रोको अभियान के तहत आशाओं को जिम्मेदारी दी गई है। आशाएं घर-घर जाकर बच्चों के लिए ओआरएस के पैकेट देने के साथ ही जिंक की टेबलेट भी उपलब्ध करा रहीं हैं। लोगों को संचारी रोग से बचाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
16 जुलाई से दस्त रोको अभियान का शुभारंभ किया गया था। पांच साल तक के बच्चों को दस्त के खतरों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को शुरू किया। इसमें जिस घर में बच्चा होगा। वहां ओआरएस के दो पैकेट व 14 जिंक की टेबलेट आशा उपलब्ध कराएंगी। करीब एक हजार आशाओं को जिम्मेदारी दी गई है।
ओआरएस का घोल बनाने की विधि भी आशा बताएंगी। एसीएमओ डॉ.पीपी श्रीवास्तव ने बताया कि 31 जुलाई तक अभियान को चलाया जाएगा। इसके तहत पोस्टर, बैनर के जरिये दस्त के कारणों, लक्षणों, रोकथाम के बारे में जागरूक किया जाएगा। प्रत्येक घर पर आशाएं जाकर जागरूक कर रही हैं। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि इसका उद्देश्य केवल बच्चों में दस्त को रोकना है और ओआरएस और जिंक की गोलियों के उपयोग को बढ़ावा देना भी है।