अल्हागंज। उप डाकघर में जमाकर्ताओं की लाखों की रकम के घोटाले की पुलिस विवेचना शुरू होने से धोखाधड़ी की नई परतें खुल रही हैं। पुलिस को डाकघर की कई ऐसी पासबुकें मिली हैं, जिनमें निवेशकों का नाम, पता और विवरण तो सही दर्ज है, लेकिन वास्तविक खाता किसी और व्यक्ति के नाम पर खुला पाया गया है। खास यह भी है कि इन खातों में कोई वित्तीय शेष नहीं दर्शाया गया है। मतलब, ऐसे खातों से सारी रकम निकाली जा चुकी है।
थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने बताया कि ऐसी पासबुकों का डाक विभाग के खातों की डिजिटल इंट्री और सिस्टम डाटा से मिलान करने पर पाया गया कि असली खाता भिन्न नाम और पहचान पत्र से खोला गया था। ऐसे खातों में रकम शेष नही होने से निवेशकर्ता परेशान हैं। उनका कहना है कि उनके खातों में कई बार रकम जमा की गई थी। पुलिस यह जानकारी जुटा रही है कि इन पासबुकों की रकम कहां गई।
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जांच में सामने आया वित्तीय गोलमाल का नया तरीका
पुलिस के अनुसार प्राथमिक जांच से यह संकेत मिल रहा है कि घोटाला एक कुशल वित्तीय जालसाजी का हिस्सा है। पासबुक का बाह्य रूप तो खातेदार को दिया गया, लेकिन डाकघर के कंप्यूटर सिस्टम में खाता किसी और व्यक्ति के नाम से लिंक कर दिया गया। उसी व्यक्ति के जरिये जमा रकम की बंदरबांट की गई और रिकॉर्ड में लेनदेन को छुपा लिया गया या फिर गुम कर दिया गया।