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Shahjahanpur News: मनु शतरूपा का प्रसंग सुनाया

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गांव जेबां में यज्ञस्थल की परिक्रमा करती महिलाएं। संवाद
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पुवायां। गांव जेबां में चल रहे शतचंडी महायज्ञ और श्रीरामकथा में कथा व्यास अरविंद दीक्षित ने मनु शतरूपा का प्रसंग सुनाया।
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कथा व्यास ने सुनाया कि मनु शतरूपा धरती के पहले पुरुष और स्त्री थे। दोनों ने अपना राज्य पुत्र को सौंप दिया और नैमिषारण्य जाकर तपस्या करने लगे। दोनों ने भगवान विष्णु को अपने पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने के लिए कहा।
मनु शतरूपा ने भगवान विष्णु से कहा कि आप हमारे पुत्र बनें हमारी यही इच्छा है। दोनों की इच्छा की पूर्ति करते हुए प्रभु श्री हरि ने वरदान देते हुए कहा कि त्रेतायुग में आप दोनों को अयोध्या के महाराजा दशरथ और महारानी कौशल्या के रूप में जन्म मिलेगा और आपके पुत्र के रूप में मेरा सातवां अवतार अर्थात श्रीराम का जन्म होगा। इसी वरदान के फलस्वरूप अगले जन्म में मनु राजा दशरथ और उनकी पत्नी शतरूपा माता कौशल्या बनीं। वहीं प्रभु श्रीराम ने उन दोनों के पुत्र के रूप में जन्म लिया। संवाद
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अजामिल की कथा सुनाई



कुर्रियाकलां। मल्हपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में नैमिषधाम से आए कथाव्यास आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित ने अजामिल की कथा सुनाई। कथा व्यास ने कहा कि कान्यकुब्ज के ब्राह्मण अजामिल जो वासना के वश होकर पापी बन गए थे। अंत समय में अपने पुत्र नारायण को पुकारते हैं। इस नाम के स्मरण मात्र से विष्णुदूत आकर उन्हें यमदूतों से बचाते हैं और मोक्ष प्रदान करते हैं। कथा श्रवण में महेश वाजपेई, संगम दुबे, योगेश त्रिवेदी का सहयोग रहा। संवाद
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