शाहजहांपुर में मिले प्राचीन हथियार
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इनमें गोरा रायपुर, निगोही, धनेका, सरथौली, खेड़ा, तिलहर के खेड़े शामिल हैं। इन स्थानों पर समय-समय पर गुप्त, मौर्य, शुंग कालीन सिक्के-मूर्तियां निकलती रही हैं। इनमें निगोही के ग्राम चैना रुरिया से प्राप्त देवी मूर्ति, सिंधौली से प्राप्त आठवीं सदी की भगवान विष्णु की मूर्ति, खुटार के पिपरिया विरसिंद से प्राप्त देवी मूर्ति, लखनऊ म्यूजियम से प्राप्त स्वर्ण फलक वाली गुप्तयुगीन मूर्तियां प्रमुख हैं।
निगोही के अंडखेड़ा में मिले थे हथियार
निगोही के गांव अंडखेड़ा में 21 मार्च 2012 को अजीत सिंह यादव अपना मकान बनवा रहे थे। मजदूर ने खेत पर खुदाई की तो कई हथियारनुमा संरचनाएं मिलीं थीं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन हथियारों को अपने कब्जे में ले लिया था। दस किलो तीन सौ ग्राम की दस वस्तुएं थीं। इनमें सात मूर्तियां और दो बर्छियां थीं।
सिंधौली में मिली थीं आठ बर्छियां
सिंधौली के बाजपुर गांव में अक्तूबर 2013 में नीरज मिश्रा के खेत से आठ बर्छियां मिलीं थीं। एसएस कॉलेज के इतिहास विभाग के सहायक आचार्य ऑर्कियोलोजिस्ट डॉ. दीपक सिंह के मुताबिक, ये हथियार तकरीबन 45 सौ ईसापूर्व के होंगे। इनका इस्तेमाल जानवरों के शिकार के लिए किया जाता था।
संग्रहीत किया जाए
ईसा पूर्व छठी सदी में शाहजहांपुर पांचाल महा जनपद का भाग था। हालांकि जनपद का इतिहास इससे भी प्राचीन समय तक जाता है। जिले में मिलीं बहुत-सी पुरातात्विक महत्व की सामग्री को बाहर भेज दिया जाता है। हम लोग इस दृष्टि से प्रयासरत हैं कि जिले से निकल रही पुरातात्विक महत्व की सामग्री को यहीं के संग्रहालयों में रखा जाए। - डॉ. दीपक सिंह, ऑर्कियोलोजिस्ट एवं सहायक आचार्य, इतिहास विभाग एसएस काॅलेज।
कई क्षेत्रों में उत्खनन जरूरी
गोरा रायपुर के टीले की चर्चा अत्यंत ऐतिहासिक पुस्तकों में है। इसके नीचे सात स्तर की संस्कृतियों के छिपे होने की संभावना जताई गई है। यहां तक कि प्रसिद्ध यात्री फाहियान तथा ह्ववेनसांग ने इस स्थान का जिक्र अपनी किताबों में किया है। राईखेड़ा, बुधवाना, शाहजंग, सरथौली, निगोही, तिलहर पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। - डॉ. विकास खुराना, इतिहास विभागाध्यक्ष, एसएस कॉलेज