इसी तरह वर्ष 1961 की गांधी चरित मानस समेत कई पुरानी किताबें भी सहेजे हुए हैं। इसके अतिरिक्त गांधी जी की तस्वीर वाले नोट और सिक्कों का बड़ा कलेक्शन उनके पास हैं। बापू की स्मृतियों को सहेजने में जमीर ने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी है। सऊदी अरब, दुबई, भूटान, नेपाल, कतर ओमान समेत 70 देशों के नोट को सुरक्षित रखा है।
देश-विदेश के नोट, वर्ष तलाशने को रखते हैं किताब
जमीर के पास देश-विदेश के नोट उपलब्ध हैं। नोट इतने पुराने हो गए, जिनके ऊपर वर्ष तक नजर नहीं आता है, पर राज्यपाल का नाम स्पष्ट दिख रहा। अंग्रेजों के जमाने के नोट व पोस्टकार्ड भी उनके पास हैं। ऐसे में जमीर ने किताब खरीद ली थी। किताब खोलकर कौन राज्यपाल उस समय था, वह देखकर तुरंत बता देते हैं। पांचवीं पास जमीर समय मिलने पर बापू की किताबों को अध्ययन भी करते हैं।
जमीर अहमद ने बताया कि बापू की स्मृतियों के साथ 70 देशों के नोट व सिक्के व 90 देशों के डाक टिकट हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी लोगों की मदद से दुर्लभ चीजों को सहेज रखा है। हमारा प्रयास है कि गिनीज या लिम्का बुक में नाम दर्ज हो जाए।