शाहजहांपुर। जीएसटी में पंजीकरण की प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। आवेदन के बाद अगर संबंधित अधिकारी सत्यापन नहीं करते हैं तो वह स्वत: ही एक माह में अप्रूव हो जाता है। ऐसे में बोगस फर्म बनाकर कई व्यापारी करोड़ों रुपये का विभाग को चूना लगा रहे हैं। पंजीकरण कहीं का दिखाकर दूसरे राज्यों से व्यापार करते हैं। इसी क्रम में 19 करोड़ के फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
बोगस फर्म को पकड़ना आसान नहीं होता है। खान इंटरप्राइजेस ईदगाह रोड, शाहजहांपुर ने केंद्रीय क्षेत्राधिकार में 29 मई 2025 को मोहम्मद अमन खान के नाम से प्रपत्र तैयार करके करीब 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाया। 19 करोड़ 28 लाख की आईटीसी ट्रांसफर की गई। फर्जीवाड़ा सामने आने पर केंद्रीय कर के अधिकारियों ने फर्म के पंजीकरण को निरस्त कर दिया। मामले में मोहम्मद अमन खान से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उनके प्रपत्रों का बिना बताए किसी ने गलत इस्तेमाल कर लिया है। इस मामले में उनकी ओर से थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस जांच कर रही है।
सरकार की ओर से जीएसटी पंजीकरण को केंद्रीय और राज्य दो हिस्सों में बांटा गया है। इसमें केंद्रीय क्षेत्र का 50 फीसदी और राज्य क्षेत्र का 50 फीसदी हिस्सा होता है। केंद्रीय क्षेत्र से निगरानी के अभाव में जीएसटी में गड़बड़ी अधिक होती है। जिले में पिछले वित्तीय वर्ष में सात से आठ बोगस फर्म पकड़ीं गईं जो कि केंद्रीय क्षेत्राधिकार में शामिल थीं।
इसमें करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी हुई। इनको बैक डेट पर कैंसिल किए जाने पर अगली फर्म जीएसटी का फायदा नहीं उठा पाती हैं। सभी को बैक डेट में कैंसिल किया गया है। इसके अलावा बोगस फर्म पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बोगस फार्म का नाम-पता गलत दर्शा दिया जाता है।
बोगस फर्म बनाने का तरीका
कुछ व्यापारी मिलकर बोगस फर्म का पंजीकरण कराते है। बाद में एक दूसरे की फर्म से व्यापार दिखाते हैं। आखिरी फर्म जिसके पास सामान की बिक्री होती है, उसको जीएसटी का लाभ मिलता है। सभी लोग मिलने वाले लाभ को मिलकर बांट लेते हैं। जिस फर्म के नाम से व्यापार होता है, उसका नाम इसमें शामिल ही नहीं होता है।
पंजीकरण में 100 फीसदी बायोमीट्रिक नहीं होने पर हो रही धांधली
जीएसटी के लिए पहले व्यापारी ऑनलाइन आवेदन करता है। आवेदक जब कार्यालय में अपने दस्तावेज जमा कराने आता है तो उसकी बायोमीट्रिक होनी चाहिए, लेकिन जीएसटी की तरफ से बनाए गए साफ्टवेयर में जरूरी नहीं है कि हर आवेदनकर्ता का बायोमीट्रिक हो। सिस्टम जिसका बायोमीट्रिक मांगता है, उसका किया जाता है। अगर सौ पंजीकरण होते है तो इसमें मात्र पांच प्रतिशत का बायोमीट्रिक ही होता है। इसकी वजह से गड़बड़ी की आशंका बढ़ जाती हैं। बायोमीट्रिक के बाद संबंधित अधिकारी को सत्यापन कार्य 30 दिन के अंदर करना होता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो साफ्टवेयर इसको खुद ही अप्रूव कर देता है।
कहीं 11 करोड़ जीएसटी हड़पने की जांच राज बनकर न रह जाए
इटावा के भरथाना स्थित नगला दुली निवासी मंदीप सिंह ने सर्वश्री इंटरप्राइजेज फर्म के पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। रोजा के लोक बिहार में फर्म को दर्शाकर कॉफी-चाय, आटा-चावल का व्यापार करने की बात कहीं थी। 30 दिन के अंदर फर्म का सत्यापन नहीं किया गया। मई माह में टीम जांच के लिए पहुंची तो न फर्म मिली न उसका मालिक। फर्म का पंजीकरण निरस्त करके रोजा थाने में फर्म संचालक मंदीप के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई। 11 करोड़ की जीएसटी हड़पने का आरोप है। फर्म के सत्यापन में लापरवाही को देखते हुए शासन ने सहायक आयुक्त भावना चंद्रा को निलंबित कर दिया गया। फर्म ने इस बीच 10.71 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की। इस मामले में सहायक आयुक्त भावना चंद्र की तहरीर पर रोजा थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले में संबंधित 10 फर्माें को नोटिस भेजा गया है। अपराध अनुसंधान शाखा से जांच कराने की संस्तुति की जा रही है। जांच में फर्माें का खुलासा होना मुश्किल है।
जीएसटी चोरी के मामले में केंद्रीय क्षेत्राधिकार की अधिकतर फर्म आती हैं। राज्य स्तर पर इनकी निगरानी सही तरीके से की जाती है इसलिए यहां पर गड़बड़ी की आशंका कम रहती हैं। सर्वश्री सिंह इंटरप्राइजेज के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराकर जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से कराने की संस्तुति की गई है।
- प्रवेश तोमर, उपायुक्त राज्यकर