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वाणिज्य कर विभाग ने शुरू कियाजीएसटी सर्वे, दुकानदारों में खलबली

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शाहजहांपुर। वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों ने विभाग के संयुक्त आयुक्त (बरेली) अरुण शंकर राय के निर्देश पर सोमवार से महानगर के विभिन्न बाजारों का भ्रमण कर गुड्स सर्विस टैक्स (जीएसटी) का सर्वे शुरू कर दिया। इसके तहत बाजारों में ऐसे कारोबारियों को सूचीबद्ध किया गया, जिन्होंने किन्हीं कारणों से अभी तक विभाग में जीएसटी के तहत पंजीकरण नहीं कराया है। हालांकि, सर्वे के दौरान अधिकारिक टीमों ने केवल पंजीकृत व्यापारियों के जीएसटी नंबर नोट करने के अलावा अन्य कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बावजूद बाजारों में वाणिज्य कर विभाग की टीमों के भ्रमण से दुकानदारों में खलबली मची रही।
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केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) नियमावली के आधार पर प्रदेश सरकार ने ऐसे व्यापारियों का जीएसटी के तहत पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है, जिनका सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये अथवा इससे अधिक है। हाल ही में लखनऊ में हुई राज्य कर विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री ने कर देयता से होने वाली आय बढ़ाने के लिए अधिकारियों को बाजारों का सर्वे कर नए व्यापारियों को जीएसटी में पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए थे। इसी के अनुपालन में संयुक्त आयुक्त के निर्देश पर स्थानीय अधिकारियों ने टीमें बनाकर सर्वे शुरू किया। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जिले मेें विभिन्न व्यवसायों से जुड़े ऐसे 20 हजार से अधिक व्यापारी हो सकते हैं जो जीएसटी पंजीकरण के दायरे में आ रहे हैं, लेकिन पंजीकरण सिर्फ 11 हजार व्यापारियों ने कराया है।
सर्वे के तहत इन टीमों ने महानगर के मेन मार्केट बहादुरगंज समेत लकड़ी मंडी, गल्ला मंडी, लोहा मंडी और गोविंदगंज में भ्रमण किया। इस दौरान अधिकारियों को आया देख कई दुकानदार अपने प्रतिष्ठान नौकरों के हवाले कर दाएं-बाएं हो लिए। अधिकारियों ने ऐसे व्यापारियों पर कोई कार्रवाई करने के बजाय उन्हें जीएसटी के लाभ गिनाए। सहायक आयुक्त संतोष कुमार ने बताया कि इससे व्यापार में सुगमता आती है और प्रीमियम धनराशि जमा किए बगैर दस लाख रुपये बीमा भुगतान की सुविधा मिलती है। सर्वे में असिस्टेंट कमिश्नर दीप्ति गुप्ता, वाणिज्य कर अधिकारी ललित तिवारी, अवधेश कुमार, एसपी सिंह, रामबाबू सक्सेना, राहुल गौरव आदि शामिल रहे।
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जीएसटी में लिखा-पढ़ी इतनी ज्यादा हो गई है कि छोटे व्यापारियों को कंप्यूटर, एकाउंटेंट रखना मुश्किल हो रहा है और कई मौकों पर वकील भी जीएसटी नियमावली में उलझ जा रहे हैं। बाजार स्तर पर विभाग कैंप लगाकर स्वयं नए व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन कराए।
-सचिन बाथम, महानगर अध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल (कंछल गुट)
व्यापारी रजिस्ट्रेशन कराने को तत्पर हैं, लेकिन अधिकारी उनका मार्गदर्शन नहीं कर रहे। टर्नओवर सीमा बढ़ाए जाने पर तमाम छोटे व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन कैंसिल कराने पड़े। अधिकारियों को ऐसा कोई अभियान चलाने से पहले व्यापार संगठनों को सूचना देनी चाहिए।
-पंकज वर्मा सराफ, जिलाध्यक्ष, आदर्श व्यापार मंडल
जीएसटी का हिसाब रखना व्यापारियों के लिए बड़ा पेंचीदा काम है। पहले मंथली फार्म भराया जाता है, फिर तिमाही जीएसटी आर-1 और बाद में पूरे वर्ष का जीएसटी 9-आर, जबकि तीनों प्रपत्रों में सूचनाएं एक जैसी होती हैं। माल खरीदने वाला व्यापारी जीएसटी पर दर्ज नहीं करता तो आईटीसी मिस मैचिंग का ठीकरा विक्रेता पर फोड़ दिया जाता है, भले ही उसने जीएसटी मेें बेंचे गए माल का ब्यौरा दर्ज कर रखा हो। पंजीकरण से पहले यह दिक्कतें दूर होनी चाहिए।
-अक्षत सक्सेना, टैक्स सलाहकार
अधिकारियों की टीम किसी जांच के लिए नहीं, बल्कि व्यापारियों जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने को जागरूक करने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है। सर्वे के दौरान व्यापारियों की दिक्कतें भी नोट की जा रही हैं ताकि उनका समाधान भी कराया जा सके।
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-श्रीपाल, वाणिज्य कर उपायुक्त/नोडल अधिकारी जीएसटी
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