शहर में चौक और सदर बाजार क्षेत्र में विराजे गणपति बप्पा को शोभायात्रा निकालकर गर्रा तट पर विसर्जित कर दिया गया। इस बार की खास बात यह रही कि पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराते हुए जबरदस्ती गणपति बप्पा की दोनों प्रतिमाओं को नदी के किनारे गड्ढे खुदवाकर उसमें विसर्जित कराया। गड्ढों में फायर ब्रिगेड की गाड़ी से पानी भरा गया।
सदर बाजार क्षेत्र में महाराष्ट्र मराठा मंडल के तत्वावधान में लाला रामचरन लाल धर्मशाला में 17 सितंबर को गणपति बप्पा की दिव्य प्रतिमा को स्थापित किया गया था। शुक्रवार को सुबह महिलाओं और पुरुषों ने विधि-विधान से विघ्न विनाशक गणपति की पूजा-अर्चना की और आरती कर सुख-संपन्नता की कामना की। महिलाओं ने सिंदूरोत्सव के माध्यम से सुहाग की रक्षा के लिए गणपति महाराज से कामना की। दोपहर बाद फूलों से सजे रथ पर गणपति बप्पा को विराजमान कर ढोलबाजे के साथ अबीर-गुलाल खेलते श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा निकाली। आकर्षक झांकियों के बीच सदर बाजार क्षेत्र में कई स्थानों पर मराठों ने काफी ऊंचाई पर लटकाई गईं मटकियों को भी फोड़ा। डीजे की धुन पर युवाओं ने जमकर नृत्य भी किया।
शोभायात्रा बहादुरगंज, मशीनरी मार्केट, घंटाघर, चौक, चारखंभा होते हुए गर्रा तट पर पहुंची। वहां सीओ सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल ने कोतवाल केके तिवारी और उनकी टीम के सहयोग से गणपति बप्पा की प्रतिमा को गर्रा नदीं में प्रवाहित नहीं होने दिया। हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए मूर्ति के लिए पहले से ही खुदवाए गए गड्ढे को पानी से भरवाया गया। पानी भरने का काम फायर ब्रिगेड ने किया। पता चला कि गड्ढा भरने से पहले ही गाड़ी का पानी खत्म हो गया। शोभायात्रा में समिति के अध्यक्ष अर्जुन सूर्यवंशी, सुदामा शिंदे, सरजेराव घोरपड़े, नीरज वाजपेयी, अनिल कदम, चंद्रकांत माने, आशीष गुप्ता, लक्ष्मी घोरपड़े, बविता माने, वंदना कदम, नंदा सूर्यवंशी, सागर शिंदे, विष्णु हंबीरे, सीमा माने, अमर गवली आदि का योगदान रहा।
उधर, चौक में सीता मठिया के समीप उदासीन अखाड़ा में विराजे गणपति को भी शुक्रवार को धूमधाम से शोभायात्रा निकालकर गर्रा नदी में विसर्जित करने के बजाया पुलिस के दबाव में भू समाधि दे दी गई। इस बीच पुलिस से आयोजकों की काफी नोकझोंक भी हुई, लेकिन पुलिस ने गड्ढा खुदवाकर मूर्ति को उसी में विसर्जित करा दिया। शोभायात्रा में डीजे की धुन पर श्रद्धालुओं ने खूब डांस किया और अबीर-गुलाल से होली खेलते हुए श्रद्धालु गणपति बप्पा मोरया-मंगल मूर्ति मोरया के जयघोष करते चल रहे थे। रास्ते में पांच स्थानों पर मटकियां भी फोड़ी गईं। शोभायात्रा में शैलेंद्र सिंह, अरुण रस्तोगी, मनोज शर्मा, शानू शर्मा, हरनाम कटियार, सुचित सेठ, अंकुर कटियार, संजीव वैश्य आदि का योगदान रहा।
इसके अलावा मोहल्ला खिरनीबाग से विसर्जन के लिए ले जाई गई गणेश मूर्ति ले जाने वाले भक्त गर्रा नदी के तट पर मूर्ति नदी में विसर्जन के लिए अड़ गए। मौके पर मौजूद कोतवाली और सदर बाजार पुलिस ने लोगों को समझाया कि कोर्ट के आदेश से मूर्ति को नदी में विसर्जन नहीं करने दिया जा रहा है। पुलिस की काफी मशक्कत के बाद लोगों की समझ में आया। इसके बाद लोगों ने नदी किनारे बने गड्ढे में मूर्ति का रखा।