एसएस कॉलेज में ‘वाणिज्य एवं प्रबंध के क्षेत्र में शोध प्रविधि के अनुप्रयोग’ विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर फिदा हुसैन अंसारी ने कहा कि शोधों और अनुसंधानों पर ही किसी भी राष्ट्र की समृद्धि और विकास निर्भर करता है। इससे देश की अपेक्षित विकास दर भी बढ़ाई जा सकती है।
वाणिज्य संकाय के तत्वावधान में हुई कार्यशाला में प्रोफेसर अंसारी ने कहा कि उच्च शिक्षा में मौलिक शोध और नवीन अनुसंधान के द्वारा देश की दशा और दिशा दोनों में परिवर्तन लाया जा सकता है। भारत में उपलब्ध परंपरागत ज्ञान आधुनिक रूप में शोधों के द्वारा नवीन उत्पादों को प्रस्तुत कर सकने में सक्षम है। उच्च शिक्षित युवा जितना नवीन शोधों के लिए प्रेरित होगा, देश के कृषि और उद्योग जगत का उतना तेजी से विकास होगा। विशिष्ट अतिथि राजकीय रजा कॉलेज रामपुर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जेके जैन ने कहा कि शोध प्रक्रिया और शोध की मौलिक दृष्टि होनी चाहिए।
जीएफ कॉलेज के प्रोफेसर एआर सिद्दीकी ने कहा कि शोध कार्य में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। विज्ञान ने अनुसंधानों के माध्यम से विश्व को नया जीवन स्तर दिया है। सन इंस्टीट्यूट के निदेशक पंकज भार्गव ने कहा कि विकास और शोध के लिए कुशल प्रबंध की आवश्यकता होती है, यदि शोध का उचित प्रबंध न हो तो शोध अपने उद्देश्य को खो देता है। प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र ने कहा कि उद्योग, व्यापार और वाणिज्य की प्रगति देश में हो रहे शोध अनुसंधान पर निर्भर करती है, शोध प्रक्रिया इस प्रकार होनी चाहिए, जिसे भारतीय परिवेश में सरलता से अपनाया जा सके। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. दीपक मिश्र, डॉ. राम निवास गुप्ता, डॉ. मधुकर श्याम शुक्ल, डॉ. देवेंद्र सिंह आदि ने भी विचार रखे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को शोल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया। संयोजक डॉ. अंकित अवस्थी ने आभार व्यक्त किया।