समाजवादी पेंशन योजना के लाभार्थियों को पेंशन देने के साथ ही उनके परिवार के बच्चों को शिक्षित और पूरे परिवार को साक्षर किया जाएगा। इसके लिए शासन ने शिक्षा के साथ पेंशन योजना को जोड़ दिया है। पेंशन योजना के लाभार्थियों का पूरा परिवार शिक्षित होने की दशा में लाभार्थियों की पेंशन में प्रतिवर्ष 50 रुपये की बढ़ोत्तरी की जाएगी, जिससे पेंशनधारकों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया जा सके।
बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को शिक्षित करने के प्रदेश सरकार तरह-तरह के तरीके आजमा रही है। परिषदीय विद्यालयों में छात्र नामांकन बढ़ाने और छात्र उपस्थिति को बेहतर करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाली समाजवादी पेंशन योजना को भी शामिल कर लिया है। समाजवादी पेंशन योजना से लाभान्वित परिवार के मुखिया को शिक्षा, साक्षरता एवं स्वास्थ्य से संबंधित शर्तों को स्वीकार करके उनका पालन करना होगा। इसके एक साल पूरा होने के बाद लाभार्थियों को 50 रुपये की वार्षिक बढ़ोत्तरी भी की जाएगी। इसके लिए पेंशन योजना के लाभार्थियों को अपने परिवार के छह से 14 साल तक के बच्चों को हर हाल में विद्यालय में नामांकित कराना होगा। साथ ही उन बच्चों का विद्यालयों में नियमित उपस्थित रहना होगा, जो कुल शैक्षिक दिवसों के 70 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।
पेंशन मिलने के बाद लाभान्वित परिवार का प्रत्येक सदस्य, जिसकी उम्र 15 वर्ष से अधिक है। यदि साक्षर नहीं है तो उसे साक्षरता मिशन कार्यक्रम में नियमित रूप से शामिल होना होगा। यह रिपोर्ट तैयार करके शिक्षकों को खंड शिक्षा अधिकारियों को जमा करनी होगी। खंड शिक्षा अधिकारी बीएसए दफ्तर में रिपोर्ट जमा करेंगे, जहां से जिला समाज कल्याण अधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी। तभी उन लोगों को नियमित पेंशन योजना का लाभ मिलेगा।
‘समाजवादी पेंशन योजना के लाभार्थियों की सूची खंड शिक्षा अधिकारियों और नगर शिक्षा अधिकारियों को दे दी गई। निर्देश दिया है कि वे लोग अध्यापकों की सूची दे दें, जिससे शिक्षक पेंशन धारकों के घर जाकर यह सुनिश्चित कर लें कि उनके घरों में छह से 14 वर्ष तक के सभी बच्चे विद्यालयों में नामांकित हैं या नहीं। सभी लोग साक्षर हैं कि नहीं। यह सूची बनाकर खंड शिक्षा अधिकारियों को शिक्षक उपलब्ध कराएंगे।’
- राजेश वर्मा, बीएसए