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3.47 करोड़ पानी में बहाए फिर भी नहरें सूखी

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शाहजहांपुर। नहरों की सफाई पर बीते दो वित्तीय वर्ष में अफसर 3.47 करोड़ रुपये का बजट फूंक चुके हैं, लेकिन नहर का बहाव अब भी थमा हुआ है। तिलहर, निगोही, रोजा आदि क्षेत्रों में अंतिम छोर तक नहर का पानी नहीं पहुंच रहा है। सिल्ट जमा होने से कई जगह नहरें समतल हो चुकी है। माइनरों का पानी खेत में भरने से फसलें खराब हो रही है, जिससे किसान परेशान हैं। पिछले महीने सेहरामऊ दक्षिणी में नहर का पानी आसपास के खेतों समेत स्कूल में भर गया था। हथौड़ा स्टेडियम के पास रोजा माइनर लंबे समय से बंद होने के कारण आसपास के लोगों ने उसे पाटकर कब्जे कर लिए हैं।
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पिछले दो वित्तीय वर्ष में जिले की छोटी-बड़ी 121 नहरों की सिल्ट सफाई, पटरियों की मरम्मत आदि पर करीब 3.47 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च हो चुकी है। इसके बावजूद नहरों की दशा में कोई खास सुधार नहीं हो सका है। एमएलसी अमित यादव रिंकू विधान परिषद मेें नहरों की सिल्ट सफाई और उस पर व्यय धनराशि से जुड़ा सवाल उठा चुके हैं। इसके बावजूद नहरों की दशा में सुधार नहीं हुआ जबकि वर्ष 2017 और 2018 में छोटी बड़ी नहरों में 465 किमी सिल्ट सफाई पर 197.16 लाख रुपये खर्च हुए। इसके अलावा चालू वित्तीय वर्ष में 503 किमी लंबाई में सिल्ट सफाई कराई गई। इसके लिए 1.50 करोड़ रुपये का बजट अलग से जारी हुआ था।
कुर्रिया कलां में सैकड़ों बीघा खेत प्यासे
कुर्रिया कलां। क्षेत्र से निकली शारदा नहर से क्षेत्र के गंगानगर, भानपुर, बाबरपुर, कौढ़ा, उमराह, जसनपुर, बरेंडा, नगलाजाजू, कुइया, सरथौली, रतनापुर, बहरी कुर्रिया, कुतुआपुर, कुर्रिया कलां आदि गांवों की हजारों हेक्टेयर जमीन सिंचित होती है, लेकिन उसमें पानी नहीं आने से गेहूं की उपज पर काफी फर्क पड़ सकता है। वाटर लेवल नीचे जाने से क्षेत्र की अधिकांश बोरिंग ठप हो गई हैं। कुछ काश्तकार अपने सबमर्सिबल पंप से रात में ही बिजली आने पर फसलों की सिंचाई कर पा रहे हैं।
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जलालाबाद मेें नहर बनी दिखावटी
जलालाबाद। कांट ब्लॉक से शाहजहांपुर मार्ग होकर कलक्टरगंज गांव से गुजरी नहर के केवल उसी हिस्से में सफाई हुई, जो रोड से दिख सकता है। हरदोई जिले के सीमावर्ती गांव ककराला तक गई यह नहर लंबे समय से सूखी पड़ी है। सफाई का काम सिर्फ उन्हीं हिस्सों में हुआ, जहां गांव नजदीक हैं। नहर के बाकी हिस्से में झाड़ियां खड़ी हैं। इस कारण पानी की सप्लाई शुरू होने पर भी अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता।
ईंटारोरा के पास सूखी पड़ी माइनर
पुवायां। बंडा क्षेत्र की ईंटारोरा माइनर की लंबे समय से सफाई नहीं होने से नहर गत कई वर्ष से सूखी पड़ी है। गांव के सरदार बलदेव सिंह के अनुसार गेहूं, गन्ना और धान में पानी ज्यादा लगता है, लेकिन कई साल से नहर सूखी होने से सिंचाई को किसान निजी साधनों पर निर्भर हैं। इसी क्षेत्र के सुधीर सिंह का कहना है कि उनके कई एकड़ खेत नहर के किनारे हैं, लेकिन सिंचाई ट्यूबवेल से करनी पड़ती है। उधर कोरोकुइयां में शारदा की मेन ब्रांच इन दिनों सूखी पड़ी है।
झाड़ियों से घिरीं तिलहर की नहरें
तिलहर। कटरा से निकलकर गांव सुल्तानपुर से आगे गई शारदा नहर और सुल्तानपुर से निकली गंधार माइनर शिवदासपुर, राजनपुर होते हुए कांट की ओर निकली है। इन नहरों की सफाई हो रही है, लेकिन तिलहर एवं कपसेड़ा माइनरें झाड़ियों से घिरी हैं। इस रजवहा की लंबे अरसे से सफाई नहीं हुई है। शिवदासपुर के किसान नेता धीरेंद्र यादव ने बताया कि नहरों में पानी न आने से किसान परेशान हैं। कई स्थानों पर लोगों ने सूखी नहर से आने-जाने के लिए रास्ता बना लिया है।
जैतीपुर में सूखी नहरों पर हुए कब्जे
जैतीपुर। क्षेत्र में कटरा की शारदा नहर और बरेली के रजबहा से निकली दो माइनरें करीब 50 गांवों की फसलों को सींचने के काम आती रहीं। करीब 13 किमी लंबी शारदा माइनर ताहरपुर, खेड़ा रठ, बझेड़ा भगवानपुर, नौगवां, गोहावर, विक्रमपुर और शिकारपुर होकर बहगुल नदी में मिलती है। लंबे समय से यह दोनों नहरें सूखी हैं। उनके कुलाबे और नालियां गायब होने के साथ नहरों की पटरी पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। नहरें ठप होने से धीमरपुरा, बमियाना, पलिहुरा, करकौर, खिरिया, जुझारपर, कटहा, बकैनियां, गेरा, बैसरा-बैसरी, खमरिया आदि गांवों में सिंचाई का कोई साधन नहीं है। लंबे समय से सूखी पड़ी नहरों की पटरियां जोतकर ग्रामीणों ने खेत बना लिए हैं और पुलिया तोड़ दी है।
जिले में करीब 600 किमी नहरों की सफाई के लिए चालू वित्त वर्ष मेें 1.50 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। सफाई कराने के बाद नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ा जा रहा है। हथौड़ा स्टेडियम के पास रोजा माइनर में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है क्योंकि वह नगर निगम में आ गई है और वहां हुए कब्जे भी निगम को हटाने हैं। बंडा क्षेत्र की ईंटारोरा माइनर शारदा नहर खंड लखीमपुर खीरी से संचालित हो रही है।
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- आरके वर्मा, अधिशासी अभियंता, शारदा नहर खंड
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