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एफएसडीए का अल्हागंज में सोनपापड़ी फैक्टरी और तेल कारखाना पर छापा

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शाहजहांपुर। होली के बाजार में खान-पान की मिलावटी वस्तुएं बिकने के बावजूद अभी तक निष्क्रिय बने रहे खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) के अधिकारियों की मिलावट को लेकर नींद तब टूटी जब तमाम लोगों ने त्योहार मनाने को खान-पान की वस्तुओं की खरीदारी कर डाली। अफसरों की टीम ने मावा माफिया की गाड़ी पकड़ने को कई घंटे तक बरेली मोड़ पर डेरा डाला, लेकिन कोई सुराग नहीं लगने पर जलालाबाद कूच किया। वहां की पैकेज्ड पानी के प्लांट से पैकिंग में इस्तेमाल मैटेरियल का नमूना लिया और बाद में अल्हागंज मेें सोनपापड़ी की उसी फैक्टरी पर छापा मारा, जहां दिवाली के दौरान घटिया सोनपापड़ी पकड़ी गई थी। वहां से तैयार सोनपापड़ी का नमूना लेने के साथ वहीं के तेल कारखाने से राइस ब्रान ऑयल का नमूना भरा।
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अल्हागंज पहुंची एफएसडीए की टीम ने सबसे पहले वीरपाल राठौर के स्पेलर प्लांट पर धावा बोला। उस समय मशीन से सरसों की पेराई हो रही थी, लेकिन वहां राइस ब्रान के कनस्तर भी रखे पाए गए। राइस ब्रान को सिंथेटिक कलर और एसेंस से सरसों तेल में बदले जाने के संदेह में तेल कारखाने में देर तक छानबीन हुई, लेकिन मौके पर नकली सरसों तेल बनाने का कोई सामान नहीं मिला। इस पर अधिकारियों ने एक खाली कनस्तर की तली से राइस ब्रान तेल का सैंपल लिया और कोल्हू स्वामी को सफाई रखने के कड़े निर्देश दिए। वहां से टीम आगे बढ़ी तो कटरा-बिल्हौर स्टेट हाईवे के किनारे खेतों में टिन शेड के नीचे बेहद गंदे माहौल में मनोज गुप्ता का सोनपापड़ी कारखाना चलता पकड़ा। गंदगी से नाराज अफसरों ने कर्मचारियों से भट्ठी तुड़वा दी और तैयार सोनपापड़ी का सैंपल जांच को सील कराया। इसके साथ ही विभागीय लाइसेेंस निरस्त कर बिक्री भी प्रतिबंधित कर दी। एक अन्य सोनपापड़ी फैक्टरी की सूचना पर अफसरों ने रामगंगा तटबंध मार्ग पर भी छानबीन की, लेकिन वहां फैक्टरी नहीं मिली।
मावा माफिया पकड़ने को फेल हुई नाकाबंदी
अधिकारियों को सूचना मिली थी कि होली के बाजार में मिलावटी और सिंथेटिक मावा खपाने के लिए माफिया कार से तिलहर की ओर से आ रहा है। सूचना के आधार पर एफएसडीए के अभिहित अधिकारी विजय कुमार वर्मा और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा टीम के साथ सुबह करीब 11 बजे बरेली मोड़ स्थित एक ढाबे पर जा पहुंचे। जहां धंधेबाजों के रुकने का ठिकाना बताया गया था। अफसरों ने सहायता के लिए बरेली मोड़ पुलिस चौकी प्रभारी को सूचित कर कई सिपाही भी बुला लिए। करीब ढाई घंटे तक अधिकारी वहां सुरागरसी मेें लगे रहे और इस बीच तमाम गाड़ियां गुजर गईं, लेकिन मावा की गाड़ी नहीं आई। अफसरों को संदेह है कि ढाबा संचालक के सूचना लीक करने से धंधेबाजों ने अपना रूट बदल लिया।
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जलालाबाद में पानी के प्लांट पर मारा छापा
एफएसडीए की टीम ने दोपहर करीब एक बजे जलालाबाद की ओर रुख किया। वहां एफएसओ रामजी शुक्ला द्वारा सर्विलांस से जुटाई सूचना के आधार पर अफसरों ने गुलड़िया गांव जाकर पानी के प्लांट पर छापा मारा। चूंकि, वहां से पैकेज्ड पानी का नमूना पहले लिया जा चुका है। इसलिए अधिकारियों ने एफएसएसएआई के नियमों के मुताबिक पैकेजिंग मैटेरियल की जांच कराने को खाली बोतल का नमूना लिया। वहां से टीम अल्हागंज रवाना हो गई।
मिलावटी मावा से बीमार हो चुकीं महिलाएं और बच्चे
जैतीपुर। क्षेत्र के हिम्मतपुर, डभौरा, गढ़िया रंगीन, बिरिया मकरंदपुर मोड़, खेड़ा-बझेड़ा नबादा मोड़ आदि स्थानों पर मावा और लौंज का बड़ा कारोबार होता है। यह स्थान बरेली बदायूं के बॉर्डर पर होने के कारण मिलावट के धंधेबाजों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहे हैं। यहां की लौंज बरेली, फरीदपुर, दातागंज, नरियावल, नवाबगंज आदि कस्बों तक सप्लाई होती है। गत वर्ष जून में कस्बे में मिलावटी मावा खाने से छह-सात महिलाएं और बच्चे बीमार हो गए थे। इसी तरह नमकीन बनाने के लिए दुकानदार एक बार इस्तेमाल हो चुका रिफाइंड का पीपा 500 से 700 रुपये में खरीद लाते हैं, जबकि शुद्ध रिफाइंड पीपा 1400 रुपये का मिलता है। एफएसओ नरेंद्र शर्मा के अनुसार मिल्क पाउडर से खोया मिठाई बनाने की सूचना मिली है और जल्द ही प्रशासन के सहयोग से टीम बनाकर इस धंधे पर रोक लगाई जाएगी।
मिलावटी मावा के धंधेबाजों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और कोशिश है कि उन्हें माल समेत शहर में प्रवेश करने से पहले ही धर दबोचा जाए। अल्हागंज में उसी सोनपापड़ी फैक्टरी को निशाने पर लिया गया, जहां दिवाली के दौरान भारी मात्रा में घटिया सोनपापड़ी जब्त कर नष्ट कराई गई थी। सभी नमूने जांच के लिए राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। - वीके वर्मा, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए
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