गुस्सा दोनों ही हैं। जिले में संचालित हो रही पांच चीनी मिलों में गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों को केंद्र सरकार के इस फैसले से कोई खास खुशी नहीं मिली है। इस संबंध में गन्ना किसानों और किसान नेताओं से बात की तो उन्होंने भी नाराजगी का इजहार किया।
किसान घटा सकते हैं गन्ने का रकबा!
पुवायां। गन्ने के सरकारी मूल्य में दस रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी किए जाने को किसान और किसान नेताओं ने मजाक बताते हुए कहा कि कोई भी सरकार किसानों के भले के लिए काम नहीं कर रही है। किसानों को खाद, दवाएं बेहद महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही हैं, गन्ने में एक वर्ष तक खेत भी फंसाना पड़ रहा है। इसके बाद चीनी मिलें भुगतान देने में आनाकानी करती हैं और सरकार चीनी मिलों से मिलीभगत कर किसानों का शोषण कराने में साथ देती है। किसानों का कहना है कि सरकार के रवैये को देखते हुए किसान गन्ने की फसल का रकबा कम करने पर विचार कर सकते हैं।
किसानों की पीड़ा
एफआरपी में दस रुपये की बढ़ोतरी किसानों के साथ धोखा है। गन्ने का मूल्य प्रति क्विंटल 350 रुपये होना चाहिए। सरकार के फैसले का विरोध किया जाएगा।
- महेंद्रपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष भाकियू (भानु गुट)
कोई भी सरकार हो वह पूंजीपतियों के इशारे पर चलती है। फसलों के रेट तय करने के लिए समिति होनी चाहिए, जिसमें किसान संगठनों के पदाधिकारी भी रखे जाने चाहिए।
- अनिल यादव, तहसील अध्यक्ष भाकियू (टिकैत गुट) गांव लालपुर पुवायां
बेहद कम बढ़ोत्तरी की गई है। किसान परेशान है। लागत के अनुपात में रेट बढ़ाए जाने चाहिए, जिससे किसान को लाभ हो सके। भुगतान भी समय से मिलना चाहिए।
- गुरदेव सिंह किसान, अगौना बुजर्ग, पुवायां
‘केंद्र सरकार प्रत्येक वर्ष गन्ना समर्थन मूल्य जारी करती है। इस बार केंद्र सरकार ने अभी से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एफआरपी) जारी किया है। इसका लाभ गन्ना किसानों को पेराई सत्र 2015-16 से मिलेगा।’
- बीके पटेल, जिला गन्ना अधिकारी