भूमिहीन हुए परिवारों के युवा मजदूरी करने को मजबूर
घट रही रामगंगा की तेज लहरें लहलहाती फसलों के साथ कृषि भूमि को निगलती जा रही है। नदी इस वर्ष अब तक सैकड़ों बीघा कृषि भूमि को निगलकर रेत के ढेर में तब्दील कर चुकी है।
इस बार रुक-रुककर बढ़ रही रामगंगा ने कई बार में अब तक कुनियां शाहनजीरपुर, अटा, हरिहरपुर, पहरूआ, मौजमपुर, बीघापुर-सिठौली, अतरी निजामपुर, भूड़ा, औरंगाबाद आदि गांवों की सैकड़ों बीघा कृषि भूमि को अपने में समाहित कर रेत के ढेर में तब्दील कर दिया है।
सैकड़ों बीघा कृषि योग्य भूमि के नदी में समा जाने से राममूर्ति, आशाराम, इंद्रपाल, धारमसिंह, सुरेंद्रपाल, जगतपाल, रामू, वीरेंद्र कुमार शास्त्री, गिरीश आदि दर्जनों किसानों के परिवार के युवा रोजी रोटी कमाने के लिए दिल्ली, गुजरात,पंजाब, हरियाणा,उत्तराखंड आदि प्रांतों में गए हैं।
रामगंगा की बाढ़ से प्रतिवर्ष होने वाले भू-कटाव को रोकने की मांग को लेकर क्षेत्र के किसान अनेकों बार ब्लाक, तहसील और जिला मुख्यालय तक धरना प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हुआ। परिणामत: रामगंगा की बाढ़ से भू विनाश का क्रम जारी है।