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Shahjahanpur News: गंगा और रामगंगा में उफान, बाढ़ ने और कसा शिकंजा

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मिर्जापुर में बाढ़ से ​घिरे पहरुआ संपर्क मार्ग पर निकलते ग्रामीण। संवाद
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शाहजहांपुर। उत्तराखंड और पश्चिमी उप्र के बांधों-बैराजों से काफी मात्रा में पानी की निकासी जारी रहने से जिले से होकर बहने वाली गंगा, रामगंगा समेत सहायक नदियाें में शुक्रवार को उफान आ गया। कलान के भैंसार बांध पर गंगा खतरे के निशान के करीब तो अल्हागंज क्षेत्र में डबरी घाट पर रामगंगा खतरे के निशान से 12 सेमी ऊपर पहुंच गई। इससे जलालाबाद से मिर्जापुर और अल्हागंज तक करीब चार दर्जन गांवों में बाढ़ की आपदा और विकराल हो गई।
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सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, भैंसार बांध पर बीते 24 घंटों के दौरान गंगा का जलस्तर 20 सेमी बढ़कर 143.50 मीटरगेज हो गया। यहां गंगा खतरे के निशान से सिर्फ पांच सेमी नीचे रह गई है। इस बीच, नरौरा बैराज से पानी की निकासी 18678 क्यूसेक से बढ़कर दो लाख 600 क्यूसेक हो गई। पानी की यह खेप अगले दो दिन में यहां पहुंचने पर गंगा की बाढ़ का दायरा बढ़ने के आसार हैं।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से करीब दो फुट नीचे है, लेकिन उसमें कई बांधों-बैराजों से पानी आने के कारण डबरी घाट पर रामगंगा 58 सेमी बढ़कर खतरे के निशान 137.42 मीटरगेज पर पहुंच गई है। इन दोनों नदियों में उफान बढ़ने से जलालाबाद व कलान तहसील में नदियों के तटवर्ती करीब चार दर्जन गांव चारों तरफ पानी से घिर जाने से वहां का जनजीवन संकट में पड़ गया है।
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खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं गर्रा और खन्नौत
शाहजहांपुर। शहर के समीप गर्रा और खन्नौत नदियों में उफान बढ़ने से दोनों नदियां शुक्रवार को सुबह खतरे के निशान से दस सेमी ऊपर पहुंच गईं। बीते 24 घंटों के दौरान गर्रा का जलस्तर 85 सेमी बढ़कर 149.00 मीटरगेज और खन्नौत का जलस्तर 40 सेमी बढ़कर 145.85 मीटरगेज हो गया।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार पीलीभीत के ड्यूनी डाम से गर्रा में पानी की निकासी 2123 क्यूसेक घटकर 22413 क्यूसेक हो गई है, लेकिन कठिना से गर्रा नदी में जा रहा पानी 5500 क्यूसेक से बढ़कर 30000 क्यूसेक हो गया है। पीलीभीत की खखरा नदी का 34000 क्यूसेक पानी भी गर्रा में आ रहा है। इसलिए इन दोनों नदियों के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने का अनुमान है। संवाद


नदियों का बढ़ता जलस्तर (मीटरगेज में)

नदी खतरे का निशान वर्तमान जलस्तर वृद्धि
गंगा 143.65 143.50 0.20
रामगंगा 137.30 137.42 0.58
गर्रा 148.80 149.00 0.85
खन्नौत 145.75 145.85 0.40


रामगंगा और बहगुल के तटीय गांवों के मुहाने पर पहुंचा पानी
जलालाबाद। रामगंगा व बहगुल के तटीय इलाकों में लगातार बढ़ रहा पानी लोगों को डराने लगा है। बुधवार से बढ़ना शुरू हुआ पानी कई गांवों के मुहाने तक पहुंच गया है। इसके साथ ही सैकड़ों एकड़ फसलों समेत तमाम खेत फिर से डूब गए हैं। प्रभावित गांवों के लोगों का मानना है कि यदि पानी बढ़ता रहा तो हालात गत माह आई बाढ़ से बदतर हो जाएंगे।
बृहस्पतिवार रात से शुक्रवार सुबह तक करीब एक फुट से ज्यादा पानी बढ़ चुका है। तिकोला पुल की एप्रोच रोड और उसके आगे बनी पुलिया के बीच करीब सौ मीटर के दायरे में पानी सड़क के ऊपर पहले की तरह ही तेजी से बहने लगा है। प्रशासन ने आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था की है और उसी से लोग आ-जा रहे हैं। कसारी गांव में भी आवागमन मोटर बोट के जरिये हो रहा है।
संगहा गांव के पूर्व प्रधान गुड्डू यादव, चंद्रसेन और शिवशरण, थाथरमई के महिपाल सिंह, रघुवर आदि ने बताया कि मौजूदा जलस्तर गत माह की बाढ़ जैसा हो चुका है। इसलिए पानी बढ़ना जारी रहा तो जीवन संकट में पड़ जाएगा। खेत डूब जाने से पशुओं के लिए चारे का संकट हो गया है। पिछले दिनों लगातार तीन चार दिन हुई बारिश से भूसा भीगकर काला पड़ जाने से जानवरों के खाने लायक नही बचा है। संवाद

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बहगुल के पार बसे गांवों के लिए मांगी नाव

जलालाबाद। तिकोला पुल के आगे सड़क के ऊपर से बह रहे पानी को पार कराने के लिए वहां नाव लगा दी गई है, लेकिन बहगुल नदी के पार बसे एक दर्जन से ज्यादा गांवों के लोगों के लिए नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। इन गांवों के ग्रामीण इसी रास्ते से होकर आते-जाते हैं। तिकोला पुल पर डाली गई नाव छोटी होने के कारण उसमें एक बार में छह-सात से ज्यादा लोग बैठ नहीं पाते। इसलिए बहगुल पार बसे ग्रामीणों ने प्रशासन से अतिरिक्त नाव सुलभ कराने की मांग की है। संवाद



गर्रा की बाढ़ से घिरे कुर्रियाकलां क्षेत्र के तमाम गांव
कुर्रियाकलां। गर्रा नदी में आई बाढ़ से क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों का जनजीवन संकट में पड़ गया है। गत वर्ष जुलाई में आई बाढ़ से क्षेत्र के कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए थे। उस दौरान प्रभावित गांवों में पहुंचे केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद से ग्रामीणों ने चौहनापुर गांव के किनारे से भमौली गांव तक पक्के तटबंध बनाने की मांग की थी। मंत्री के निर्देश पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने सर्वे कर लगभग एक किमी लंबा तटबंध बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा, लेकिन बाढ़ से बचाव की इस परियोजना को स्वीकृति नहीं मिलने से सिंचाई विभाग ने फौरी राहत के लिए कच्चा तटबंध बनाया। इसके लिए बांस का जाल बनाकर एवं बोरियाें में मिट्टी भरकर पांच कच्ची ठोकरें बनाई गईं। यह ठोकरें शुक्रवार को नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण पानी में बह गईं।
इससे पहले वर्ष 2008 में आई बाढ़ में गुर्रा गांव के आधे से ज्यादा घर कटकर नदी में समा गए थे। इसके बाद 2012 में आई बाढ़ में गांव का अस्तित्व ही खत्म हो गया। गांव के लोग नदी से दूर अपने खेतों में घर बनाकर रहने लगे। अब नदी धीरे-धीरे कटान करके वहां बने घरों के मुहाने तक पहुंच गई है। लोग इस बात से चिंतित हैं कि पानी बढ़ना जारी रहा तो उनके घर बह जाएंगे। ग्रामीण रात भर जागकर अपने बच्चों, पशुओं और सामान की देखभाल कर रहे हैं।
क्षेत्रीय विधायक अरविंद सिंह के अनुसार गत वर्ष भेजी गई बाढ़ बचाव परियोजनाओं को मंजूरी नही मिल सकी, लेकिन इस बार भमौली, चांदापुर, राईखेड़ा आदि गांवों के लिए अलग-अलग बाढ़ बचाव परियोजनाएं स्वीकृत कराने का प्रयास करेंगे। संवाद


रिंग रोड समेत तिलहर-निगोही मार्ग पर थमा यातायात
तिलहर। गर्रा में आए उफान के कारण पानी शुक्रवार को सुबह नगरिया मोड़ से अजीजगंज की ओर जाने वाले रिंग रोड समेत निगोही मार्ग पर आ गया। इस कारण इन दोनों मार्गों पर वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया। उधर, गत वर्ष गर्रा में आई से बरबाद हो चुका खुदागंज क्षेत्र का रामेश्वरगंज गौंटिया गांव फिर से टापू बन गया है। वहां ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव लगाई गई है। जलस्तर लगातार बढ़ने से किनारे पर बसे अजमाबाद, चितीबोझी, रटी, बिहारीपुर, रटा आदि गांवों के कई घरों में भी पानी आ गया है। निगोही मार्ग और नगरिया मोड़ से निकले रिंग रोड पर तेजी से पानी बहने के कारण इन मार्गों पर आवाजाही रोक दी गई है। इस बीच, प्रशासनिक टीम के साथ पहुंचे एसडीएम रवींद्र कुमार ने ग्रामीणों को हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिया। कुतुबपुर गांव के श्याम पाल ने बताया बाढ़ से बाजरा और धान की फसलों को क्षति हुई है। इसी गांव के यशपाल ने बताया खेतों और घरों तक पानी भर जाने से पशुओं के लिए चारा भी नहीं मिल रहा है। संवाद


रामगंगा से कटान का राजस्व टीम ने लिया जायजा
परौर। राजस्व कानूनगो सुखबीर सिंह ने हल्का लेखपाल अनुज सिरोही और अन्य कर्मचारियों के साथ शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित नारायण नगर पश्चिमी, मोहनपुर, बिचपुरी और मंझा का भ्रमण कर बाढ़ में डूबी फसलों और भूमि कटान वाले हिस्सों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग के प्रयासों से नारायण नगर के पास कटान कम हुआ है, लेकिन पानी खेतों में भर जाने से फसलों काे नुकसान हुआ है। कानूनगो के अनुसार नुकसान का आकलन कराने के बाद उसी के अनुसार राहत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस दौरान जनहित शिक्षा सेवा समिति के प्रबंधक सत्यवीर सिंह चौहान, त्यागी जी पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक मानवेंद्र शुक्ला, हरिओम कुशवाहा, संजीव कुमार आदि मौजूद रहे। संवाद

स्टेट हाईवे की पुलिया से मिर्जापुर कस्बे में पहुंचा गंगा का पानी
मिर्जापुर। गंगा में उफान आने से जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाईवे पर करीब चार फुट पानी तेजी से बह रहा है। हाईवे की पुलिया से होकर पानी शुक्रवार को सुबह कस्बे के आबादी क्षेत्र में पहुंच गया। हालांकि, कस्बे के अंदर पानी अभी मार्गों के किनारे भर रहा है। बाढ़ से मोहकमपुर, महोलिया, गुटेटी, इस्लामनगर, आजादनगर, भरतपुर, पैलानी उत्तर, बख्तावरगंज, धीयरपुरा, धोबियानगला, पकड़िया नगला आदि गांवों के खेत जलमग्न हो जाने से सैकड़ों हेक्टेयर शकरकंद, उर्द, मक्का, बाजरा आदि फसलें खराब हो गई हैं। शमशाबाद स्टेट हाईवे पर लगभग 200 मीटर दूरी में पानी से तेजी से निकलने से वहां आवागमन खतरनाक हो गया है, लेकिन लोग जान की परवाह किए बगैर ही बैलगाड़ी और नाव से निकल रहे हैं। उधर, रामगंगा की बाढ़ से जरियनपुर-सिठौली मार्ग, थरिया-परौर मार्ग, कुंडरी संपर्क मार्ग भी डूब गए हैं। बाढ़ ने दहेलिया गांव के प्राथमिक विद्यालय को भी अपनी चपेट में ले लिया है। संवाद

मिर्जापुर में बाढ़ से घिरे पहरुआ संपर्क मार्ग पर निकलते ग्रामीण। संवाद

मिर्जापुर में बाढ़ से घिरे पहरुआ संपर्क मार्ग पर निकलते ग्रामीण। संवाद

मिर्जापुर में बाढ़ से घिरे पहरुआ संपर्क मार्ग पर निकलते ग्रामीण। संवाद

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