सिटी पार्क में सोमवार से श्रीराम कथा शुरू हो गई। वृंदावन के प्रख्यात कथावाचक संत विजय कौशल महाराज ने मंगलाचरण के बाद कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि कथा में हम कितना बैठे यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि कथा हमारे अंदर कितना बैठी। कथा व्यास ने कहा कि व्यक्ति को दुष्कर्म छोड़ने की नहीं बल्कि सद्कर्म ग्रहण करने की आवश्यकता है। भगवान हमारे संरक्षक हैं इसलिए उनकी शरण में जाने वाला व्यक्ति दुष्कर्म की राह पर नहीं चल सकता। परमात्मा से स्नेह करना चाहिए। इस बीच उन्होंने पंच देवों की उपासना पर विशेष बल दिया। विजय कौशल महाराज ने भगवान से साक्षात्कार के लिए सत्संग को आवश्यक बताया। दान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कथा व्यास ने कहा कि दान हमेशा छिपाकर करना चाहिए। दान को यदि दिखाकर किया जायेगा तो वह व्यर्थ हो जाएगा। प्रभु के दर्शन करने के लिए हमें काम क्रोध लोभ, मोह को त्यागना पड़ेगा। प्रभु को अहंकार भी पसंद नहीं है। करनी एवं कथनी में अंतर नहीं होना चाहिए। शास्त्र यदि हमारे व्यवहार में नहीं हैं तो उस ज्ञान में दीमक लग जाती है। जीवन को शास्त्र के अनुरूप ढालना चाहिए। इससे पूर्व मुख्य यजमान त्रिलोकीनाथ पांडेय और उनकी पत्नी भुवनेश्वरी देवी ने व्यासपीठ का पूजन किया। संत विजय कौशल ने भगवान गणेश और हनुमान जी की स्तुति कर कथा आरंभ की। समापन पर आरती के पश्चात प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में कैलाश नारायण अग्रवाल, विदुषी मिश्रा, अखिलेश मिश्र, द्वजेंद्र मिश्र, किशन अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, सिद्धार्थ शंकर शर्मा, प्रतिभा शर्मा, योगेश गुप्ता, पिंकू भईया, हरभजन तिवारी, अनूप गुप्ता, रीता शर्मा, उपासना मिश्रा, लक्ष्मी मिश्रा, राजीव शंकर शर्मा, अतुल मिश्रा आदि का सहयोग रहा। कथा 13 फरवरी तक अपरान्ह दो से पांच बजे तक चलेगी।