शाहजहांपुर। लुधियाना से दो दोस्तों के साथ साइकिल से बिहार जा रहे हरेंद्र की रास्ते में तबियत बिगड़ गई। पैरों में छाले पड़ गए और शरीर भी जवाब दे गया। साइकिल चलाने की हिम्मत नहीं बची तो दोस्तों ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया और शाहजहांपुर में हरदोई बाईपास पर छोड़कर चले गए। परेशान हाल हरेंद्र को देखकर कुछ लोगों ने उन्हें खाना खिलाया। फिर एक होमगार्ड ने ट्रक रुकवाकर हरेंद्र को उसमें बैठाकर आगे रवाना कर दिया।
बिहार के जिला पश्चिमी चंपारण में थाना मझौलिया क्षेत्र के गांव राजाघर निवासी हरेंद्र साहनी लुधियाना में एक सिलाई फैक्टरी में काम करते थे। बकौल हरेंद्र लॉक डाउन के चलते फैक्टरी बंद हो गई। मालिक ने कुछ दिन तो खाना खिलाया लेकिन जब आमदनी होना बंद हो गई तो उसने हाथ खड़े कर लिए। मकान मालिक ने भी किराए के लिए ताने देना शुरू कर दिया। रहने और खाने का साधन न होने की वजह से उन्होंने घर जाने का मन बनाया। दो अन्य साथियों की मदद से दो साइकिल खरीदीं और 26 अप्रैल को घर के लिए सफर शुरू कर दिया। लुधियाना से पश्चिमी चंपारण जिला लगभग 1100 किलोमीटर दूर है। 26 अप्रैल से सफर शुरू करने के बाद रविवार को यहां हरदोई बाईपास चौराहे पहुंच गए। लगभग 600 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद हरेंद्र का शरीर जवाब देने लगा। पैरों में छाले पड़ गए। उन्होंने अपने दो अन्य साथियों से साइकिल चलाने में असमर्थता जताई। इस पर साथी नाराज हो गए और हरेंद्र को छोड़कर उसका बैग लेकर चले गए।