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गंगा का जलस्तर और बढ़ा, रामगंगा स्थिर

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शाहजहांपुर में बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद उफनाई गर्रा नदी। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। नरौरा बैराज से बीते दिन हुई 1.11 लाख क्यूसेक पानी की निकासी का असर गंगा के बढ़ते जलस्तर के तौर पर दिखने लगा है। गंगा 43 सेंटीमीटर बढ़ गई है। हालांकि अन्य बैराजों से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा कम हो जाने से रामगंगा का जलस्तर बीते 24 घंटे से स्थिर है, लेकिन शहर के समीप गर्रा नदी का जलस्तर दूसरे दिन 1.05 मीटर बढ़ गया और खन्नौत नदी में पांच सेमी पानी बढ़ गया। मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि नदियों के जलस्तर में शनिवार को भी वृद्धि जारी रहेगी।
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सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को शुक्रवार सुबह मिली सूचना के अनुसार नरौरा से गंगा में 91851 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पानी की यह मात्रा बीते दिन से करीब दस हजार क्यूसेक कम है, लेकिन गंगा के जलस्तर में अगले 24 घंटे तक कमी आने के कोई संकेत नहीं है। उधर, अन्य बैराजों से छोड़े गए 42958 क्यूसेक पानी से रामगंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। फिलहाल बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा एक सेमी बढ़कर 160.31 मीटर पर बह रही है, लेकिन शनिवार को उसके जलस्तर में वृद्धि तय मानी जा रही है।
इधर, गर्रा बीते दिन की तुलना में अप्रत्याशित रूप से 1.05 मीटर बढ़कर 146.05 मीटर पर आ गई। जलस्तर बढ़ने से गर्रा फाटक पर नदी का बहाव राजघाट की सीढ़ियों तक पहुंच गया है। बरेली मोड़ बाईपास वाले पुल पर भी नदी ने फैलाव ले लिया है। यही नहीं, खन्नौत नदी भी पांच सेमी बढ़कर 143.45 मीटर पर बह रही है। सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार ड्यूनी डाम से शुक्रवार को 10410 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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परौर के बाशिंदों पर दोहरे कटान का खतरा
परौर। रामगंगा में पानी बढ़ने के कारण तटवर्ती गांवों के काश्तकार काफी परेशान हैं क्योंकि उन पर भूमि कटान का दोहरा खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ बाढ़ के पानी से कटान होना शुरू हो गया है, वही नारायण नगर बाजार मोहल्ला और मोहनपुर के पानी का ढलान रामगंगा की तरह बन जाने के कारण इन मजरों के पानी भी भूमि कटान कर रामगंगा में गिर रहा है। गांव के साबिर खां व नारायणनगर के हरिओम के खेत गांव की तरफ से आने वाले पानी से कट रहे हैं। हालांकि, सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए रामगंगा के किनारे एक मीटर चौड़ी मेड़ बनाई, लेकिन पानी के तेज बहाव ने उसे भी काट दिया। बीते दिन निरीक्षण पर आए सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अनूप कुमार को गांव वालों ने बताया कि जब तक एक मीटर चौड़ी नेट (जाल) पर रेत की बोरियां नहीं लगाई जातीं, तब तक क्षेत्र के किसानों पर कटान की दोहरी मार पड़ती रहेगी। गांव के संतराम कुशवाहा, चुन्नीलाल कुशवाहा, फकीरे लाल, रामरतन, बृजेश कुमार, हरिओम कुशवाहा, सतेंद्र सिंह, बालक राम राठौर, धनपाल, रामेश्वर प्रजापति आदि ने अपने गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश और बांधों-बैराजों से पानी की निकासी बढ़ने से गंगा और रामगंगा का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन अभी बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। बैराजों से पानी की मात्रा कम हुई है। इसलिए रात में बारिश नहीं होने पर शनिवार सुबह तक इन दोनों नदियों के जलस्तर में कमी आ सकती है। रामगंगा के सभी तटवर्ती गांव बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित हैं और कटान रोकने के लिए गत माह लगाई गईं जिओ ट्यूब की ठोकरों को मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है।
-अनूप कुमार, सहायक अभियंता (सिंचाई)
25 मिमी बारिश के बाद धूप ने बढ़ाई उमस भरी गर्मी
शाहजहांपुर। हवा के कम दबाव का क्षेत्र बनने के साथ बृहस्पतिवार शाम से बादल छाने शुरू हुए तो रात में उमस पैदा होने से न्यूनतम तापमान एक डिग्री बढ़कर 26 डिग्री सेल्सियस हो गया, लेकिन शुक्रवार को तड़के झमाझम बारिश होने लगी। सुबह दिन निकलने पर बूंदाबांदी थमने पर वायुदाब में वृद्धि हुई तो हवा चलने के साथ बादल तितर-बितर हो गए और बाद में इतनी चटख धूप निकली कि गर्मी और उमस से अधिकतम तापमान चार डिग्री बढ़कर 35 डिग्री सेल्सियस हो गया। इस वजह से कई दिन के अंतराल के बाद जनजीवन उमस भरी गर्मी से परेशान रहा।
वायुदाब सामान्य से सात अंक बढ़ने के कारण दिन में आसमान साफ रहा, लेकिन शाम को वायुदाब मेें कमी आने से रात में फिर बादल छाने और शनिवार को बारिश होने के आसार बढ़ गए हैं। - डॉ. मनमोहन सिंह, मौसम वैज्ञानिक, गन्ना शोध परिषद
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