शाहजहांपुर/मिर्जापुर। गंगा, रामगंगा में उफान के कारण जलमग्न हुए तटवर्ती गांवों मेें रहने वाले लोगों की दुश्वारियां बढ़ने लगी हैं। जिन ग्रामीणों ने गृहस्थी का सामान घरों से निकालने के बाद ऊंचे स्थानों पर डेरा डाला है, वे खान-पान और अन्य जरूरत की चीजों वाली किट मिलने के बाद भी परेशान हैं। उन्हें खाना पकाने के लिए ईंधन, पीने के लिए शुद्ध पानी और सिर छिपाने के लिए पन्नियों की सख्त जरूरत है। इस बीच, गंगा, रामगंगा के जलस्तर में मंगलवार को चौथे दिन भी वृद्धि जारी रही।
बीते 24 घंटे की तुलना में कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर पांच सेमी बढ़कर 143.59 मीटर पर पहुंच गया है। इसी तरह रामगंगा आठ सेमी बढ़कर 159.75 मीटर पर पहुंच गई है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक मंगलवार सुबह विभिन्न बैराजों से दोनों नदियों में 139608 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ है। इसमें 1.13 लाख क्यूसेक पानी नरौरा बैराज से गंगा में निकला है। सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार बदायूं के कछला घाट पर बीते दिन की तुलना में गंगा का जलस्तर 15 सेमी घटकर 163.55 मीटर रह गया है और गंगा मेें अतिरिक्त पानी की निकासी भी कम हुई है, इसलिए बुधवार शाम से गंगा और उसकी सहायक रामगंगा के जलस्तर में कमी आने के आसार हैं।
नाव से जलमगग्न गांवों तक पहुंचे लेखपाल
लेखपाल सत्येन्द्र कुमार सिंह ने मंगलवार को पैलानी उत्तरी ग्राम पंचायत के प्रधान फारुख अली के साथ ट्रैक्टर ट्रॉली और नाव के जरिए बाढ़ से घिरे आजाद नगर, इस्लामनगर और पैलानी का दौरा कर बाढ़ पीड़ितों की दिक्कतों को नजदीक से देखा। बाढ़ पीड़ित अपने बच्चों और महिलाओं के साथ गृहस्थी का सामान सिर पर रखकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करते दिखे। लगभग एक पखवाड़े से बाढ़ का कहर झेल रहे ग्राम आजादनगर, कमथरी, चितार,पैलानी और इस्लामनगर के बाशिंदे नाव की कमी से बेहद परेशान हैं। आजादनगर के घरों में पानी भर जाने के कारण सड़कों पर डेरा डाले विस्थापित परिवारों ने प्रशासन से सिर छिपाने के लिए पन्नी की व्यवस्था कराने की गुहार लगाई है।
बाढ़ पीड़ितों के लिए चौंरा-बसोला मार्ग सबसे सुरक्षित है, लेकिन रोड पर सिर छिपाने के लिए पन्नी आदि नहीं होने से तेज धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है।
-चमन खां, आजादनगर
बाढ़ के समय सबसे बड़ी समस्या ईंधन और पानी की है। प्रशासन ने खाद्यान्न किट तो मुहैया करा दी लेकिन ईंधन भीग जाने से खाना बनाने की समस्या आड़े आ रही है। खाने के पैकेट मिलें तो कठिनाई कम होगी।
-शौकीन खां, आजादनगर
बाढ़ से घिरे नलों का दूषित पानी पीने और दिन भर तेज धूप और रात में खुले आसमान के नीचे रहने से खांसी, जुकाम, बुखार और खाज-खुजली से परेशान हैं लेकिन दवा की कोई व्यवस्था नहीं है।
-मेंहदी हसन, आजादनगर